Home कविताएं देशभक्ति कविता ‘लोकतन्त्र को लोकतन्त्र बना रहने दो ‘!

‘लोकतन्त्र को लोकतन्त्र बना रहने दो ‘!

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आज  लोकतन्त्र – मतदान  के बाद सत्ता-तंत्र , मंत्री-तंत्र  और लाठी-तंत्र  होते देखा |

यह  देश की सेहत और शासन-प्रशासन दोनों  हेतु जहर सरीखा  क्यों  नहीं  मानते  ,

शक्ति-इसलिए  नहीं  होती  चाहे  जिसे अपमानित  करो  या   निलंबित  करा  दो ,

गुप्त-तंत्र  से  उनकी  वेदना  सुनो जो बेगार  करते हैं ,अपमान सहते हैं ,डरते  हैं ,

कुछ नेता-दुर्भाव रखते हैं मित्र-भाव  नहीं,अच्छा है लोकतन्त्र -लोकतन्त्र  बना रहे , 

उन्हें ढूंढो जो देश की तरक्की के दुश्मन हैं,उनके पंख उखाड़ो,कानून का मान बढ़ाओ |

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