Home Uncategorized “रुसवाई अच्छ नहीं, भटकाव से बचो,मार्गदर्शक बनो, हौसला बुलंद बनाए रक्खो ” |

“रुसवाई अच्छ नहीं, भटकाव से बचो,मार्गदर्शक बनो, हौसला बुलंद बनाए रक्खो ” |

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[1]

‘अनुशासन’ से  सही दिशा  में मेहनत  का, नतीजा सुख  कर  होता  है,
‘ बेतरतीब  काम ‘ करने  का  जमाना  लग  गया ,  ‘ लक्ष  को  साधो ‘ !

[2]

‘मंजिल’ मिले या ना मिले, ‘भटकाव’ की स्थिति भी हो ,
‘ इंसान ‘ खुद अपना  रास्ता चुनकर ही,’आगे बढ़ता  है’ !

[3]

‘ आप  ‘ मंजिल ‘ तो   तय  करते  हैं , ‘ मार्गदर्शक ‘  नहीं  ढूंढते ,
‘बिना योजना, ‘कल्पना के आधार’ पर  आगे  बढ़े  तो, ‘धोखा  खा  जाओगे’ !

[4]

मेरी   सोच
“हम   सीखना   चाहें   तो   सीनियर्स   की   दूरदर्शिता  ,कार्यानुभव  , जागरूकता  , ईमानदारी  , 

अनुशासन  ,   शिष्ट  व्यवहार   देखकर   सलीका   सीख   सकते   हैं   ‘!

[5]

‘बड़ों  की  ‘खूबियों  व  गुणों’ को  परख़  कर  ही, नक्शे  कदम  पर  चलें,
‘ऐसा  न  हो ‘ वह  लोग ‘ अयोग्य , राजनैतिक  बेईमान ,  स्वार्थी  हों ‘ !

[6]

मानव  की  सोच  कमाल  की  है  !
‘दान  करते  काम  को  भगवान  देखते  हैं , चोरी  को  नहीं,
‘पुण्य  करते  को  भगवान  देखते  हैं , पाप  करते  को  नहीं,
‘प्रार्थना  सबकी  भगवान  सुनते  हैं,निंदा  करते  नहीं देखते,
‘ प्राणी  बुद्धिमान  है ,  बचने  के  सभी  रास्ते  खोल   रखे  हैं |
[7]
‘गुरु  की  शरण  में  क्या  आये , ‘ सारे  नजारे  बदल  गए,
‘किस्ती का रुख  भी  बदल गया, ‘किनारे  भी  बदल  गए’ !
[8]
‘कहीं  ऐसा  ना  हो  जाए, ‘कहीं  वैसा  न  हो  जाए,
‘सोचते  रहते  हैं  हम,
‘प्यार  की  रुसवाईयों  के  ख्वाब  से  भी,
‘ कांपता  है  दिल  मेरा ‘ !
[9]
‘तेरी  दोस्ती ‘  हमारी  रगों  में  ‘ घुस  गई ‘  है  इस  कदर,
‘दुश्मनी की ताबीर’ सोचने  में  भी,’डर लगने लगा  है अब’ !
[10]
‘वक्त’ बुरा  है  तो, ‘वक्त’ पर  हावी  होने  का  करतब  दिखाओ,
‘यही   कामयाब   होसलों   का , ‘ कामयाब   इशारा   है  ‘ !
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