Home कविता ‘रिस्तों में ‘त्याग’ और ‘समर्पण’ जरूरी है’ |

‘रिस्तों में ‘त्याग’ और ‘समर्पण’ जरूरी है’ |

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‘प्यारी   बातें   करने  से ‘  ‘रिस्तों  में   मजबूती  का  पुल  बनता   है’ ,

‘उदासीनता  व  ठंडापन’  ‘रिस्तों  को’ ‘ दीमक  की  तरह  खा  जाता है ‘,

‘रोमांटिक   पलों   को   हाथ   से   फिसलने   न   दें ‘, ‘पूरा   आनंद   लें ‘ ,

‘झूठ    न    बोलें ‘,  ‘बात   छिपाने   पर ‘ ‘ रिस्तों   में   दूरी   बढ़ती    है ‘ ,

‘गलतफहमी    होते    ही ‘  ‘ आपसी   विश्वास  में   कमी  आ  जाती   है’ ,

‘त्याग   और   समर्पण’  ‘ दोनों   ज़रूरी   हैं ‘, ‘तभी  रिस्ते  संभलते  हैं ‘ |

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