Home कविताएं देशभक्ति कविता राष्ट्र की एकता अखंडता आचरण संघर्ष हमारे ज्वलंत प्रश्न हैं

राष्ट्र की एकता अखंडता आचरण संघर्ष हमारे ज्वलंत प्रश्न हैं

0 second read
0
0
1,322

‘राष्ट्र की एकता’ , ‘अखंडता’ ,’आचरण’ ,’संघर्ष’ –‘हमारे ज्वलंत प्रश्न हैं’ ,
‘आरक्छ्ण का भूत’ तो ‘कहीं आतंकवाद’ , ‘सांसें फुलाए जा रहा है’ ,
‘अपने गिरहबान में’ ‘कोई नहीं झाँकता’ ,’ दूसरे को बेनकाब करते हैं’ ,
‘सियासत’ ‘इतनी बेशर्म’ व ‘ काली लगेगी’ , ‘सोचकर भी काँपते हैं हम’ |

Load More Related Articles
Load More By Tara Chand Kansal
Load More In देशभक्ति कविता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘कामयाबी पर गुमान’ , ‘शेर-दिल ‘ को भी ‘गुमनामी मे ‘ धकेल देगा

‘कामयाबी पर गुमान’ , ‘शेर-दिल ‘ को भी ‘गुमनामी मे ‘ धक…