Home धर्म ‘रहमतों के द्वार खुले रहेंगे तेरे लिए’ !

‘रहमतों के द्वार खुले रहेंगे तेरे लिए’ !

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कितने   भी   घटिया   लोग   मिलें   जिंदगी    में ‘ ,

‘सदा  अपने दिल को’ ‘मक्का-मदीना  बनाए  रक्खो’ ,

‘न  तो  जमाने   की  खुराफ़ातों   में  उलझोगे   कभी ‘,

‘रहमतों  के  द्वार’  ‘खुले   रहेंगे’   ‘तेरे   लिए   ताजिंदगी’ |

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