Home कोट्स Motivational Quotes यदि इन 14 कारणों में से एक से भी ‘ग्रसित’ हो तो ‘ मरे प्राणी’ की श्रेणी है उसकी |प्रेरणादायक |

यदि इन 14 कारणों में से एक से भी ‘ग्रसित’ हो तो ‘ मरे प्राणी’ की श्रेणी है उसकी |प्रेरणादायक |

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🙋‍♂ *!!! ज्ञानार्जन !!!* (*मृत्यु   के   चौदह   प्रकार* )
राम- रावण  युद्ध  चल  रहा  था ,  तब  अंगद  ने  रावण  से  कहा – तू  तो  मरा  हुआ  है ,  मरे  हुए  को  मारने  से  क्या  फायदा  ?
रावण  बोला –  मैं  जीवित  हूँ ,  मरा  हुआ  कैसे ?
अंगद  बोले ,  सिर्फ  साँस  लेने  वालों  को  जीवित  नहीं  कहते  –  साँस  तो  लुहार  का  धौंकनी  भी  लेती  है !
*तब  अंगद  ने  मृत्यु  के  14  प्रकार  बताए -*
अंगद  द्वारा  रावण  को  बताई  गई  ये  बातें  सर्वकालिक  हैं !  यदि  किसी  व्यक्ति  में  इन  14  दुर्गुणों  में  से  एक  दुर्गुण  भी 
मौजूद  है ,  तो वह  मृतक  समान  माना  जाता  है !  रामचरितमानस  के  लंका  काण्ड  का  यह  प्रसंग  अत्यंत  सारगर्भित 
और  शिक्षणीय  है  :
*कौल  कामबस  कृपिन  विमूढ़ा। *
*अतिदरिद्र  अजसि  अतिबूढ़ा। ।*
*सदारोगबस  संतत  क्रोधी ।*
*विष्णु  विमुख  श्रुति  संत  विरोधी ।।*
*तनुपोषक  निंदक  अघखानी ।*
*जीवत  शव  सम  चौदह  प्रानी ।।*
*1.  कामवश :*  जो  व्यक्ति  अत्यंत  भोगी  हो ,  काम  वासना   में  लिप्त  रहता  हो ,  जो  संसार  के  भोगों  में  उलझा  हुआ  हो ,
वह  मृत  समान  है ।  जिसके  मन  की  इच्छाएं  कभी  खत्म  नहीं  होतीं  और  जो  प्राणी  सिर्फ  अपनी  इच्छाओं  के   अधीन
होकर  ही  जीता  है ,
वह  मृत  समान  है ।  वह  अध्यात्म  का  सेवन  नहीं  करता  है ,  सदैव  वासना  में  लीन  रहता  है ।
*2.  वाम  मार्गी:*  जो  व्यक्ति  पूरी  दुनिया  से  उल्टा  चले ,  जो  संसार  की  हर  बात  के  पीछे  नकारात्मकता  खोजता  हो ;
नियमों ,  परंपराओं  और  लोक  व्यवहार  के  खिलाफ  चलता  हो ,  वह  वाम  मार्गी  कहलाता  है ।  ऐसे  काम   करने   वाले
लोग  मृत  समान  माने  गए  हैं ।
*3.  कंजूस: *  अति  कंजूस  व्यक्ति  भी  मरा  हुआ  होता  है ।  जो  व्यक्ति  धर्म  कार्य  करने  में ,  आर्थिक  रूप  से   किसी
कल्याणकारी   कार्य  में  हिस्सा  लेने  में  हिचकता  हो ,  दान  करने  से  बचता  हो ,  ऐसा  आदमी  भी  मृतक  समान  ही  है ।
*4.  अति  दरिद्र :*  गरीबी  सबसे  बड़ा  श्राप  है ।  जो  व्यक्ति  धन ,  आत्म-विश्वास ,  सम्मान  और  साहस  से  हीन   हो ,
वह  भी  मृत  ही  है ।  अत्यंत  दरिद्र  भी  मरा  हुआ  है ।  गरीब  आदमी  को  दुत्कारना  नहीं  चाहिए ,  क्योंकि  वह  पहले
ही  मरा  हुआ  होता  है ।  दरिद्र – नारायण  मानकर  उनकी  मदद  करनी  चाहिए ।
*5.  विमूढ़: *  अत्यंत  मूढ़  यानी  मूर्ख  व्यक्ति  भी  मरा  हुआ  ही  होता  है ।  जिसके  पास  बुद्धि-विवेक  न  हो ,  जो  खुद
निर्णय  न  ले  सके ,  यानि  हर  काम  को  समझने  या  निर्णय  लेने  में  किसी  अन्य  पर  आश्रित  हो ,  ऐसा   व्यक्ति  भी
जीवित  होते  हुए  मृतक  समान  ही  है ,  मूढ़  अध्यात्म  को  नहीं  समझता ।
*6.  अजसि: *  जिस  व्यक्ति  को  संसार  में  बदनामी  मिली  हुई  है ,  वह  भी  मरा  हुआ  है ।  जो  घर – परिवार ,  कुटुंब – समाज ,
नगर-राष्ट्र ,  किसी  भी  ईकाई  में  सम्मान  नहीं  पाता ,  वह  व्यक्ति  भी  मृत  समान  ही  होता  है ।
*7.  सदा  रोगवश :*  जो  व्यक्ति  निरंतर  रोगी  रहता  है ,  वह  भी  मरा  हुआ  है ।  स्वस्थ  शरीर  के  अभाव  में  मन 
विचलित  रहता  है ।  नकारात्मकता  हावी  हो  जाती  है ।  व्यक्ति  मृत्यु  की  कामना  में  लग  जाता  है ।  जीवित  होते
हुए  भी  रोगी  व्यक्ति  जीवन  के  आनंद  से  वंचित  रह  जाता  है ।
*8.  अति  बूढ़ा :*  अत्यंत  वृद्ध  व्यक्ति  भी  मृत  समान  होता  है ,  क्योंकि  वह  अन्य  लोगों  पर  आश्रित  हो  जाता  है ।
शरीर  और  बुद्धि ,  दोनों  अक्षम  हो  जाते  हैं ।  ऐसे  में  कई  बार  वह  स्वयं  और  उसके  परिजन  ही  उसकी   मृत्यु  की
कामना  करने  लगते  हैं ,  ताकि  उसे  इन  कष्टों  से  मुक्ति  मिल  सके ।
*9.  सतत  क्रोधी :*  24  घंटे  क्रोध  में  रहने  वाला  व्यक्ति  भी  मृतक  समान  ही  है ।  ऐसा  व्यक्ति  हर  छोटी -बड़ी  बात
पर  क्रोध  करता  है ।  क्रोध  के  कारण  मन  और  बुद्धि  दोनों  ही  उसके  नियंत्रण  से  बाहर  होते  हैं ।  जिस  व्यक्ति   का
अपने  मन  और  बुद्धि  पर  नियंत्रण  न  हो ,  वह  जीवित  होकर  भी  जीवित  नहीं  माना  जाता ।  पूर्व  जन्म  के  संस्कार
लेकर  यह  जीव  क्रोधी  होता  है ।  क्रोधी  अनेक  जीवों  का  घात  करता  है  और  नरकगामी  होता  है ।
*10 .  अघ खानी :*  जो  व्यक्ति  पाप  कर्मों  से  अर्जित  धन  से  अपना  और  परिवार  का  पालन-पोषण  करता  है ,  वह
व्यक्ति  भी  मृत  समान  ही  है ।  उसके  साथ  रहने  वाले  लोग  भी  उसी  के  समान  हो  जाते  हैं ।  हमेशा  मेहनत   और
ईमानदारी   से  कमाई  करके  ही  धन  प्राप्त  करना  चाहिए ।  पाप  की  कमाई  पाप  में  ही  जाती  है  और  पाप  की  कमाई
से  नीच  गोत्र ,  निगोद  की  प्राप्ति  होती  है ।
*11 . तनु  पोषक :*  ऐसा  व्यक्ति  जो  पूरी  तरह  से  आत्म  संतुष्टि  और  खुद  के  स्वार्थों  के  लिए  ही  जीता  है ,  संसार  के
किसी  अन्य  प्राणी  के  लिए  उसके  मन  में  कोई  संवेदना  न  हो ,  ऐसा  व्यक्ति  भी  मृतक  समान  ही  है ।  जो  लोग  खाने-
पीने  में ,  वाहनों  में  स्थान  के  लिए ,  हर  बात  में  सिर्फ  यही  सोचते  हैं  कि  सारी  चीजें  पहले  हमें  ही  मिल  जाएं , बाकी
किसी  अन्य  को  मिलें  न  मिलें ,  वे  मृत  समान  होते  हैं ।  ऐसे  लोग  समाज  और  राष्ट्र  के  लिए  अनुपयोगी  होते  हैं ।
शरीर  को  अपना  मानकर  उसमें  रत  रहना  मूर्खता  है ,  क्योंकि  यह  शरीर  विनाशी  है ,  नष्ट  होने  वाला  है ।
*12. निंदक :*  अकारण  निंदा  करने  वाला  व्यक्ति  भी  मरा  हुआ  होता  है ।  जिसे  दूसरों  में  सिर्फ  कमियाँ  ही  नजर  आती  हैं ,
जो  व्यक्ति  किसी  के  अच्छे  काम  की  भी  आलोचना  करने  से  नहीं  चूकता  है ,  ऐसा  व्यक्ति  जो  किसी  के  पास  भी  बैठे , तो
सिर्फ  किसी  न  किसी  की  बुराई  ही  करे ,  वह  व्यक्ति  भी  मृत  समान  होता  है। परनिंदा  करने  से  नीच  गोत्र  का  बंध  होता  है ।
*13.  परमात्म  विमुख :*  जो  व्यक्ति  ईश्वर  यानि  परमात्मा  का  विरोधी  है ,  वह  भी  मृत  समान  है ।  जो  व्यक्ति  यह  सोच 
लेता  है  कि  कोई  परमतत्व  है  ही  नहीं ;  हम  जो  करते  हैं ,  वही  होता  है ,  संसार  हम  ही  चला  रहे  हैं ,  जो   परमशक्ति  में
आस्था  नहीं  रखता ,  ऐसा  व्यक्ति  भी  मृत  माना  जाता  है ।
*14 . श्रुति ,  संत  विरोधी :*  जो  संत , ग्रंथ ,  पुराणों  का  विरोधी  है ,  वह  भी  मृत  समान  है ।  श्रुत  और  संत ,  समाज   में
अनाचार  पर  नियंत्रण  (ब्रेक)  का  काम  करते  हैं ।  अगर  गाड़ी  में  ब्रेक  न  हो ,  तो  कहीं  भी  गिरकर  एक्सीडेंट  हो  सकता
है ।  वैसे  ही  समाज  को  संतों  की  जरूरत  होती  है ,  वरना  समाज  में  अनाचार  पर  कोई  नियंत्रण  नहीं  रह  जाएगा ।
अतः   मनुष्य   को   उपरोक्त   चौदह   दुर्गुणों   से   यथासंभव   दूर   रहकर   स्वयं   को   मृतक   समान   जीवित   रहने   से 
 बचाना   चाहिए  ।
🙋‍♂  हरि   ॐ
🙏🌹🙋‍♂ *! ! जय   श्रीराम  !!*
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