Home कविताएं देशभक्ति कविता ‘मोदी जी , शिखर पर हो , देश का कल्याण संभव है ‘|

‘मोदी जी , शिखर पर हो , देश का कल्याण संभव है ‘|

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‘लोग  प्रातः  चढ़ते    सूर्य    की   नमस्कार   व   प्रणाम   करते   हैं ‘ ,

‘डूबते   सूर्य   को   देख   दरवाजे  ,  खिड़कियाँ   बंद   कर   लेते    हैं ‘,

‘मोदी  जी’ , ‘शिखर   पर   हो ‘ ,’सख्त  कानून , तुरंत  उसका  प्रयोग ‘,

‘तुरंत   दोषी   को   सज़ा  की’ , ‘अब   देश  की   हकीकत  में  जरूरत  है’ ,

‘देश   वासियों    का   चरित्र’,’पतन  का  निम्नस्तर  प्रदर्शित  करता  है’ ,

‘महाभारत    का   अर्जुन   बन’ , ‘पापियों   के   विनाश   की  लीला  रच’ ,

‘कुछ   सरकारी   मशीनरी’  , ‘कुछ   पुलिस’  , ‘सबसे   बड़ी  रुकावट   है’ ,

‘ये  दोमुहें’  ‘अधिक्रतर  देश के  कलंक  हैं’,’कलाबाजी से बाज़  नहीं  आते ‘,

‘यदि शिखर पर हो कर भी’ ‘आप  कामयाब  नहीं  होते’ ,’देश बिखरने लगेगा’ ,

“योगी   जैसे  जीवट  और  ढूंढो  देश  मे ‘,’तभी  देश  का  कल्याण  संभव  है ‘ | 

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