Home कोट्स Motivational Quotes ]मैं’ कितना भाग्यशाली हूँ ‘ माँ ‘ को ‘दिल’ में बसाये रखता हूँ | मेरा विचारणीय द्वंद |

]मैं’ कितना भाग्यशाली हूँ ‘ माँ ‘ को ‘दिल’ में बसाये रखता हूँ | मेरा विचारणीय द्वंद |

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[1]

सोच   में  ‘ताकत’ और  ‘चमक’  होनी  चाहिए , छोटा-बड़ा   होने   का  प्रारूप  बचकाना   है,

मन  में  दीप  चलिये  , सदा  मुस्कारिए , ‘जियो  और  जीने  दो’  को  यथार्थ  में   अपनाइए  |

[2]

प्रभु –  किसी  से  नाराज़  नहीं , सबकी  झोली  भरते  हैं ,

तू   अभी   बेचैन   है   तो   झोली   में   छेड़   है   तेरी  |

[3]

मैं  कितना  भाग्यशाली  हूँ , ख़यालों  में  ‘ माँ ‘  को  बसाये   रखता   हूँ  ,

क्या  मजाल, जरा  सी  चूक  हो  जाए , गुनगुनाने  से  फुर्सत  नहीं  मिलती | 

[4]

जरा सोचो
एक हाथ से ‘थप्पड़’ लगता है, दोनों हाथों से ‘ताली’ बजती है,
‘रिश्ते’ तभी ‘निभते’ हैं जब, ‘तलब की लत’ दोनों तरफ मिले !

[5]

जरा सोचो
‘अपनेपन’  का  ‘एहसास’ ‘गमों’  को  पीछे  धकेल  देता  है ,
इसकी ‘बारीकियों’ को चलो- समाज में ‘विस्तार’ दे दिया जाए !

[6]

जरा सोचो

खुद  को  ‘तरासोगे’  तो  ‘खुशी  के  भंडार’ खुल  जाएंगे,
जो सदा ‘तलाशने’ में मगन है, ‘खामियां’ हाथ आएंगी !

[7]

जरा सोचो
बिना  ‘कुंडली’  मिलाए  हम  ‘दोस्ती’  बखूबी  निभाते  हैं,
जब  ‘चार यार’  मिले, वहीं  पर ‘चौकड़ी’ जमा  ली  हमने !

[8]

जरा सोचो
दिल  में  ‘खयाल  पर  ख्याल’  बदलते  रहते  हैं,
‘तुम ‘ कम  से  कम  ऐसे  तो  मत  ‘बदला’ करो,
कलयुग  जरूर  है माना दिल अब  भी धड़कते  हैं,
‘तुम  बदल सकते  हो’ दिल  कभी  मानता  नहीं !
[9]
जरा सोचो
‘ध्यान, ज्ञान, और  वैराग्य’  के ‘भंडार’, ‘प्रभु  शरणागत’ के ‘कल्पवृक्ष’  हैं,
जो  अंतर्मन  से  ‘उनको’ अपनाता  है, ‘ मोक्ष  के  द्वार ‘  खुल  ही  जाते  हैं !
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