Home कविताएं प्रेरणादायक कविता ‘मैं और मेरापन त्याग’ ‘सम भाव में जीना सीखो ‘ |

‘मैं और मेरापन त्याग’ ‘सम भाव में जीना सीखो ‘ |

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‘आप अपने विचारों की शक्ति से’ ,’अपनी दुनियाँ बदल सकते हो’ , 
‘यह सलाह किसने दी ‘ , ‘जीवित होते हुए भी म्रत समान जियो’ ,
‘मैं और मेरापन त्याग कर’ ,’सम भाव में जीने की कला सीखो ‘ , 
‘सजक बनो’ ,’विध्वंशक नहीं’ , ‘असंगठन में संगठित रहना प्रेरक है ‘ |

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