मुस्कराता रह

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“डूबते सूरज” को “न देख,”उगते सूरज” को “नमस्कार”करना सीख ,
“तुम्हारे जीवन” मे “चहूँ और “, “प्रातः” की “लाली” ” महक” जाएगी ,
“काली घटाओं” का ” समुद्र ” , अपना “साम्राज्य” “न फैला ” सकेगा ,
“मुस्कराता ” रह ,” जीवन ” की ” इस बेला ” का “इस्तकबाल ” कर |

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