Home कविताएं धार्मिक कविताएँ मन के विकारों को’ ‘ वश मे कर’ , ‘नाम की कमाई कर

मन के विकारों को’ ‘ वश मे कर’ , ‘नाम की कमाई कर

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‘मन के विकारों को’ ‘ वश मे कर’ , ‘नाम की कमाई कर’ ,
‘द्रढ़ निश्चय करके’ ‘ प्रेम भरोसे’ , ‘सदगुरु की वाणी सुन’ ,
‘नाम’ –‘प्रभु का रूप है’ ,’शक्ति रूप’, ‘ज्ञान रूप’, ‘आनंद रूप’ है ,
‘दबे विकारों की जड़ काट’ , ‘प्रभु नाम का अमृत पी ‘ |

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