Home ज्ञान ‘मकर संक्रांति ‘ पर पुरानी मान्यताओं के आधार पर जानकारी ‘!

‘मकर संक्रांति ‘ पर पुरानी मान्यताओं के आधार पर जानकारी ‘!

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”   मकर   संक्रांति  ”   के   शुभ   अवसर    पर  ‘ सभी   देशवासियों  के    मंगल   की   कामना ‘   और   ‘  शुभ   कामनाएँ   ‘

‘   मकर   संक्रांति  ‘  की    कुछ   मान्यताएँ    इस    प्रकार    हैं   :-

[1]

चंद्र   के   मेष   में   रेव   नक्षत्र   के   चलते   पौष   मास   शुक्ल-पक्ष  में   मकर  संक्रांति   पर्व   मनाया   जाता   है  |

[2]

इस   दिन   भगवान   सूर्य   देव   अपने   पुत्र   शनि   देव   के   घर   जाते   हैं  और   यह   पिता- पुत्र  का   अनोखा   मिलन   दिन   है   |

[3]

पहले   दिन   लोहड़ी   सम्पन्न   होती    है  |  इस   दिन    सूर्य   देव   मकर   राशि   पर    आते   हैं  |  इसे  ‘ नारायणी ‘  भी  कहा   जाता  है   | 

[4]

तमिलनाडू   में   इसे   ‘ पोंगल ‘   त्योहार   के   रूप   में   मनाया   जाता   है   | तथा   ‘कर्नाटक’ , ‘केरल’   और   ‘आंध्रा -प्रदेश ‘  में  इसे   ‘ संक्रांति  ‘

के   नाम   से   जाना   जाता   है   |

[5]

इस  त्योहार    को   सर्दी   की   बिदाई   और   गर्मी   के   आगमन   का   सूचक   भी   माना   जाता   है   |  इस  दिन  ‘ नई   फसल ‘  और   ‘नई   ऋतु  ‘

का   आगमन  होता   है   |

[6]

इस   दिन   पवित्र   नदियों    में    स्नान  करते   हैं   और   पुण्य   कमाते    हैं   |

[7]

सूर्य    की   पूजा   करके   दोपहर    में   ‘ खिचड़ी   का   अन्नदान ‘   एयर   ‘वस्त्र -दान ‘  करने   की   परम्परा    रही   है   |

[8]

भगवान    श्री   कृष्ण   ने   अर्जुन   को   गीता    उपदेश   में   स्वीकारा   है   की   सूर्य   का   उत्तरायन   बहुत   शुभ   होता   है   |

[9]

 ‘मकर   संक्रांति  ‘  के   दिन   ही   ‘ भीष्म   पितामह  ‘  ने    ‘इच्छा – म्रत्यु  ‘  चुनी    थी  |

 

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