Home ज्ञान ‘मंदी के हालात हमने पैदा किए और इल्जाम ‘अर्थ-व्यवस्था पर ‘ गज़ब तमाशा है ‘|’एक प्रारणादायक प्रसंग’|

‘मंदी के हालात हमने पैदा किए और इल्जाम ‘अर्थ-व्यवस्था पर ‘ गज़ब तमाशा है ‘|’एक प्रारणादायक प्रसंग’|

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मंदी  !

एक  छोटे  से  शहर  मे  एक  बहुत  ही  मश्हूर  बनवारी  लाल  समोसे  बेचने  वाला  था ।  वो  ठेला  लगा कर  रोज  दिन  में  500  समोसे  खट्टी  मीठी            चटनी  के  साथ  बेचता  था  | रोज  नया  तेल  इस्तमाल  करता  था  और  कभी  अगर  समोसे  बच  जाते  तो  उनको  कुत्तो  को  खिला  देता ।   बासी             समोसे  या  चटनी  का  प्रयोग  बिलकुल  नहीं  करता  था ,उसकी  चटनी  भी  ग्राहकों  को  बहुत  पसंद  थी  जिससे  समोसों  का  स्वाद  और  बढ़ जाता                था ।  कुल  मिला कर  उसकी  क्वालिटी  और  सर्विस  बहुत  ही  बढ़िया  थी ।

उसका  लड़का  अभी  अभी  शहर  से  अपनी  MBA  की  पढाई  पूरी  करके  आया  था ।

एक  दिन  लड़का  बोला  —

‘ पापा  मैंने  न्यूज़  में  सुना  है  मंदी  आने  वाली  है ,  हमे  अपने  लिए  कुछ  cost cutting  करके  कुछ  पैसे  बचाने   चाहिए,  उस  पैसे  को  हम  मंदी                के  समय  इस्तेमाल  करेंगे ‘।

समोसे वाला: ” बेटा  में  अनपढ़  आदमी   हूँ   मुझे   ये  cost  cutting  west  cutting  नहीं  आता  ना  मुझसे  ये  सब  होगा ,  बेटा  तुझे  पढ़ाया               लिखाया  है  अब  ये  सब  तू  ही  सम्भाल “।

बेटा:  ‘ ठीक  है  पिताजी  आप  रोज  रोज  ये  जो  फ्रेश  तेल  इस्तमाल  करते  हो  इसको  हम  80%  फ्रेश  और  20%  पिछले  दिन  का  जला  हुआ                   तेल   इस्तेमाल   करेंगे ‘।

अगले  दिन  समोसों  का  टेस्ट  हल्का सा  चेंज  था  पर  फिर  भी  उसके  500  समोसे  बिक  गए  और  शाम  को  बेटा  बोलता  है  देखा  पापा  हमने                आज  20%  तेल  के  पैसे  बचा  लिए  और  बोला  पापा  इसे  कहते  है  COST CUTTING ।

समोसे वाला: ‘ बेटा  मुझ  अनपढ़  से  ये  सब  नहीं  होता  ये  तो  सब  तेरे  पढाई  लिखाई  का  कमाल  है ‘।

लड़का:   ‘पापा  वो  सब  तो  ठीक  है  पर  अभी  और  पैसे  बचाने  चाहिए ।  कल  से  हम  खट्टी  चटनी  नहीं  देंगे  और  जले  तेल  की  मात्रा  30%                प्रयोग  में  लेंगे ‘।

अगले  दिन  उसके  400  समोसे  बिक  गए  और  स्वाद  बदल  जाने  के  कारण  100  समोसे  नहीं  बिके  जो  उसने  जानवरो  और  कुत्तो  को  खिला  दिए ।

लड़का: ‘ देखा  पापा  मैंने  बोला  था  ना  मंदी  आने  वाली  है  आज  सिर्फ  400  समोसे  ही  बिके  हैं ‘।

समोसे वाला: ‘ बेटा  अब  तुझे  पढ़ाने  लिखाने  का  कुछ  फायदा  मुझे  होना  ही  चाहिए ।  अब  आगे  भी  मंदी  के  दौर  से  तू  ही  बचा ‘।

लड़का:  ‘ पापा  कल  से  हम  मीठी  चटनी  भी  नहीं  देंगे  और  जले  तेल  की  मात्रा  हम  40%  इस्तेमाल  करेंगे  और  समोसे  भी  कल  से  400  हीे  बनाएंगे ‘।

अगले  दिन  उसके  400  समोसे  बिक  गए  पर  सभी  ग्राहकों  को  समोसे  का  स्वाद  कुछ  अजीब  सा  लगा  और  चटनी  ना  मिलने  की  वजह  से  स्वाद      और  बिगड़ा  हुआ  लगा ।

शाम  को  लड़का  अपने  पिता  से :  ‘ देखा  पापा ,  आज  हमे  40% तेल  , चटनी  और  100  समोसे  के  पैसे  बचा  लिए ।  पापा  इसे  कहते  है  cost कटाई      और  कल  से  जले  तेल  की  मात्रा  50%  कर  दो  और  साथ  में  टिशू  पेपर  देना  भी  बंद  कर दो ।

अगले  दिन  समोसों  का  स्वाद  कुछ  और  बदल  गया  और  उसके  300  समोसे  ही  बिके ।

शाम  को  लड़का  अपने  पिता  से:  ‘ पापा  बोला  था  ना  आपको  की  मंदी  आने  वाली  है ‘।

समोसे वाला :   ‘ हाँ   बेटा  तू  सही  कहता  है  मंदी  आ  गई  है  अब  तू  आगे  देख  क्या  करना  है  कैसे  इस  मंदी  से  लड़ें ‘।

लड़का :  ‘ पापा  एक  काम  करते  हैं ,  कल  200  समोसे  ही  बनाएंगे  और  जो  आज  100  समोसे  बचे  है  कल  उन्ही  को  दोबारा  तल  कर  मिला कर  बेचेंगे।

अगले  दिन  समोसों  का  स्वाद  और  बिगड़  गया ,  कुछ  ग्राहकों  ने  समोसे  खाते  वक़्त  बनवारी  लाल  को  बोला  भी  और  कुछ  चुप  चाप  खाकर  चले  गए। आज  उसके  100  समोसे  ही  बिके  और  100  बच  गए ।

शाम  को  लड़का  बनवारी  लाल  से : ‘ पापा  देखा  मैंने  बोला  था  आपको  और  ज्यादा  मंदी  आएगी ।  अब  देखो  कितनी  मंदी  आ  गई  है ‘।

समोसे वाला:  ‘ हाँ,  बेटा  तू  सही  बोलता  है  तू  पढ़ा  लिखा  है  समझदार  है ।  अब्  आगे  कैसे  करेगा  ‘?

लड़का :   ‘पापा  कल  हम  आज  के  बचे  हुए  100  समोसे  दोबारा  तल  कर  बेचेंगे  और  नए  समोसे  नहीं  बनाएंगे ‘।
अगले  दिन  उसके  50  समोसे  ही  बिके   और  50  बच  गए ।  ग्राहकों  को  समोसा  का  स्वाद  बेहद  ही  ख़राब  लगा  और  मन  ही  मन  सोचने  लगे  बनवारी लाल  आजकल  कितने  बेकार  समोसे  बनाने  लगा  है  और  चटनी  भी  नहीं  देता  कल  से  किसी  और  दुकान  पर  जाएंगे ।

शाम  को  लड़का  बोला , ‘  पापा  देखा  मंदी  आज  हमनें  50  समोसों  के  पैसे  बचा  लिए ।  अब कल  फिर  से  50  बचे  हुए  समोसे  दोबारा  तल  कर  गरम   करके  बचेंगे ।

अगले  दिन  उसकी  दुकान  पर  शाम  तक  एक  भी  ग्राहक  नहीं  आया  और  बेटा  बोला ‘  देखा  पापा  मैंने  बोला  था  आपको  और  मंदी  आएगी  और  देखो आज  एक  भी  ग्राहक  नहीं  आया  और  हमने  आज  भी  50  समोसे  के  पैसा  बचा  लिए ।  इसे  कहते  है  Cost Cutting  ‘।

बनवारी  लाल  समोसे  वाला  :”  बेटा  खुदा  का  शुक्र  है  तू  पढ़  लिख  लिया  वरना  इस  मंदी  का  मुझ  अनपढ़  को  क्या  पता  की  cost  cutting   क्या       होता  है  ‘।

‘ और  अब  एक  बात  और  सुन.’….

बेटा :’ क्या.’….????

बनवारी  लाल  समोसे  वाला  : ‘ कल  से  चुपचाप  बर्तन  धोने  बैठ  जाना  यहाँ  पर …. .. मंदी  को  मैं  खुद  देख  लुंगा..’

*आज   की   मंदी  ऐसी   ही   है   कर्म   खुद   के   दोष   अर्थव्यवस्था   को *

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