Home कविताएं देशभक्ति कविता ‘बे-इमानी का जहर फैला हुआ है देश में ‘ !

‘बे-इमानी का जहर फैला हुआ है देश में ‘ !

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‘अनेकों  घोटालों  की  पोल  खुल  चुकी  है’ ,’ सभी के  सामने  हैं ‘ ,

‘निश्चित  हैं’ ,  ‘सारे  लोग  प्रदूषित  घोटालों  की गंगा मे नहाये हैं ‘,

‘गजब  प्रशासन’ ,’गजब कानून’ , ‘कोई  कभी पकड़ा  ही  नहीं  जाता ‘,

‘पूरे  देश  को  उधेढ   कर  रुई   बना   डाला ‘ , ‘ तार- तार  झीना   है ‘ ,

‘उम्र  कैद ‘, ‘फांसी  की  सज़ा  के  हकदार भी’ , ‘संसद  की शोभा  बढाते  हैं ‘,

‘ज्यादा –  एक थैली  के  चट्टे- बट्टे  नज़र  आते  हैं ‘, ‘सियासत  में  छेद  है’ ,

‘बे-इमानी  का  जहर’ ‘ नीचे  से  ऊपर   तक’  ‘फैला  हुआ  है  हमारे देश   में ‘ |

 

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