Home कोट्स Motivational Quotes ‘बिना रिस्ते -‘रिस्ता’ निभाना, ‘मित्रता की परिधि’ है,यूं ‘बेमतलब’जीना है तो जीते रहो |

‘बिना रिस्ते -‘रिस्ता’ निभाना, ‘मित्रता की परिधि’ है,यूं ‘बेमतलब’जीना है तो जीते रहो |

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[1]

जरा सोचो
‘जीवन’- ‘ज्ञान’  की  परिधि  है , ‘खूबसूरत’  ख्वाब  है,
‘हंस’ कर ‘जीने  का  प्रयास’ उसे ‘आसान’  बना  देगा !

[2]

जरा सोचो
बिना ‘रिश्ते’- ‘रिश्ता’ निभाना, ‘मित्रता की परिधि’ है,
यूं  ‘ बेमतलब ‘  दुनियां  खूब  जीती  है,  ‘जीती’  रहे !

[3]

जरा सोचो
‘पढ़ाई / लिखाई’  से  ‘ज्ञान’ खूब  बढ़ता  है,  ‘तरक्की’  भी  खूब  होती  है,
‘जिंदगी’ जीने  हेतु  ‘विभिन्न  घटनाओं’ से ‘निपटना आना’  भी जरूर  है !

[4]

जरा सोचो
समयानुसार  ‘सोच’  बदलते  रहो, परंतु  ‘संस्कार’  पुराने  ही  ‘अच्छे’,
‘अति -आधुनिकता’  से  बचें, ‘जुझारू’  बन  कर  रहना  सदा  उत्तम !

[5]

जरा सोचो
कभी ‘ख्यालों’ में  आते  हो, कभी ‘यादों’  में, ‘कसमसा’ रही  है  जिंदगी,
‘ बेमिसाल ‘  और  ‘ बेदाग ‘ ‘ नुक्ते ‘  ढूंढ  रखे  हैं  ‘ हमको ‘  सताने  के !

[6]

जरा सोचो
डूबते  को  सहारा  देकर, किनारे  लगाया  था  उसको,
बाहर निकलते  ही  हमें नदी  में धका कर चलता बना,
खुदगर्जी उफान  पर  है, अच्छा बुरा  नजर नहीं  आता,
हल्के  पडते  रिश्तों   को ,  अब  ताकत  नहीं  मिलती  !
[7]
जरा सोचो
‘प्रसन्न’ मन  की स्वच्छंद ‘हिलोरें’, ‘आंतरिक’ शुद्धता  का प्रतीक  हैं,
चलो  ‘ आनंद ‘  लिया  जाए ,   मस्त  ‘ फिजाओं ‘  में  चला  जाए !
[8]
मेरी सोच
‘ आप ‘  हर  पल ‘ जवान ‘  हैं  यदि  आप  ‘ कल  की  योजनाओं ‘  को  ‘ आज ‘  से  ही 
‘ प्रारंभ ‘  करने  में  प्रयासरत  हैं  !
[9]
जरा सोचो
‘धड़कती’ करवटों की ‘बेचैनी’ आजकल ‘काबू’ में नहीं रहती,
‘वे’  दूरी  बनाए  रखते  हैं,  हमारी  ‘बेकरारी’  कैसे समझेंगे ?
[10]
जरा सोचो
न ‘खुद’ आए न कोई ‘पैगाम’ आया, ‘यादों का सिलसिला” बखूबी जारी है,
‘बड़े  बेदर्द  लगते  हैं’,  इस  ‘सोच’  के  अलावा  कुछ  भी  नहीं  हम  पर  !
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