Home कविताएं प्रेरणादायक कविता बहुत कुछ बदल जाता है

बहुत कुछ बदल जाता है

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“इंसान” “कोई मौसम” नहीं ,फिर भी “बदल” जाता है ,
“तुम्हारे होठ” “कोई कपड़ा” नहीं ,फिर भी” सिल” जाते हैं ,
“आंखे” ” कोई तालाब” नहीं ,फिर भी” भर आती” हैं ,
“दुश्मनी” किसी “बीज का नाम” नहीं,फिर भी “बोई” जाती है |

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