Home कविताएं “प्रभु के रंग में रंग जा , तर जाएगा प्यारे “|

“प्रभु के रंग में रंग जा , तर जाएगा प्यारे “|

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[1]

“सुमरण  कभी  अँधेरों  में  भटकने  ही  नहीं  देगा  तुझे ” ,
“सही मंज़िल पकड़नी है” तो” प्रेम का दीपक जलाए रख” |

[2]

” अगर  किस्मत  खराब  है ” “तो  प्रभु  भी  बख्श  देंगे  तुझे “,
“अगर नियत खराब है” “तो चुल्लू भर पानी मे ड़बना अच्छा” |

[3]

“आजकल सुविधाओं और संसाधनों का  प्राप्त करना  सरल  है “,
“प्रेम  पाना बेहद कठिन  हो गया  है “,” प्रेम का प्रायः अभाव है” ,
“प्रेम  के सागर सूख  रहे  हैं “,” हमारे चिंतन बेहद  प्रभावित  हैं ” ,
“मनुष्य प्रखर है “, ” सजग है ‘,’आत्मीय है” पर ” प्रेम रहित है “,
“प्रेम के अभाव  में  परिवार जूझ  रहे  हैं” “पूर्णतया  दशाहीन  हैं “,
“‘हिंसा और प्रतिशोध ‘ की भावना “”प्रेम को पलने ही नहीं देती “|

[4]

“आज हमारे पास कान तो  हैं” “लेकिन  हम ठीक से  सुनते  नहीं”  ,
“आँखें तो सभी के पास हैं” “लेकिन अच्छा अकसर देखते ही नहीं” ,
“मुख  से  मीठी  वाणी  निकले ” ” कितने  ही  दिन  बीत  जाते  हैं” ,
“यही मनुष्य की निद्रा अवस्था है””,जिसे जाग्रत करना जरूरी है” |

[5]

“श्याम  नाम  की  नैया  पर  सवार  हो  बढ़ते  चलो “,
“डूबती पतवार भी तर जाएगी””गजब खेवनहार है” |

[6]

“जग में भटक भटक कर थक गया “,” कोई किनारा नहीं मिला “,
“जब राम नाम सुमरण लगा “, ” किनारे ही किनारे मिलते गए “|

[7]

“सारी ख्वाहिशें उसके दरबार में रख दे “,”आगे उसका काम है “,
“जो तेरे हित में होगा “,” उसे पूरा करने में वो देर नहीं करता ” |

[8]

“जब हवा फूलों से टकराती है “,” खुशबू फैला देती है चारों तरफ ” ,
“तू भी सुसंगति का दामन पकड़ “, ” प्रभु दामन पकड़ लेंगे तेरा ” |

[9]

” संतों  की  वाणी  सुनते  रहो ” ,” उद्धार  हो  जाएगा  तेरा ” ,
“भवसागर  पार  करना  हो” “तो संतों का सानिध्य  पाओ “,
” परिवार  की  जरूरत  है ” ”  तो  स्नेह  के  पौधे  लगाओ  “,
“अपनेपन  की  जरूरत  है” “तो विश्वास का दामन  पकड़” |

[10]

“कोशिश  तो  करता  हूँ  एक  मनका” ” तेरे नाम का रोज़ फेरता रहूँ “,
“मनका बड़ा मक्कार है”,’ मुझे दुनियादारी से निकलने ही नहीं देता “|

 

 

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