Home कविताएं “प्रभु कुछ करते रहने की आदत बनाए रखना मेरी “

“प्रभु कुछ करते रहने की आदत बनाए रखना मेरी “

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[1]

‘एकाग्रता  और  मेहनत’  सही  दिशा  में  ,’मंज़िल  पर  ले  जाते  हैं ,’
‘उचित  प्रबंधन  और  संकल्प’ से ,आरंभ  कार्य  ‘सम्पन्न  होते  हैं ‘|

[2]

‘प्रभु !  मैं  बड़ा  भुलक्कड़  हूँ  अक्सर  आपकी  , मेहरबानियाँ  भूल  जाता  हूँ ,’
‘कमाल  आपका  है  आप  मेरी  गलतियों  को  नज़रअंदाज़  कर  ही  देते  हो’|

[3]

‘ जो  संघर्ष  करके  जीतता  है  उसका  आनंद  ही  कुछ  और  है ,’
‘सुरज की तरह तपना तो सीख ,’जीवन मे चमक खुद आ जाएगी ‘|

[4]

‘वस्तु मिलने से पहले तथा खो जाने के बाद कीमत का अहसास होता है’
‘मिलते ही  उसकी  कीमत भूल जाते हैं ,’दुनियाँ का  आज ये ही वसूल  है’|

[5]

“मित्रता  को  ऐसे  भी  देखिये ” !
”बुरे  दिनों  में  सुविधा ‘ ‘ उदासी  मे  मुस्कराहट ‘ ‘ बादलों  में  घनघोर  वर्षा ‘,
‘ दिन  छिपते  ही  गुदगुदाहट ‘ ‘ आँखों  में  चमक ‘ ‘  मित्रता  की  गर्माहट ‘ ,
‘शक की जगह भरोसा’ ‘अविश्वास के बजाय विश्वास”नफरत की जगह प्यार’,
हे  प्रभु ! सभी  मित्रों  में  समरसता , अपनत्व  और  घनिष्ठता  बनाए  रखना’ ,
आपसी  प्यार  बनाए  रक्खें , एक-दूसरे  के  हर  मोड  पर  सहयोगी  बने  रहें “|

[6]

“मेरी सोच ” 
” ताकत , धन, भूख, आकांक्षा , लालच, अभिमान ,आलस, प्रेम, घ्रणा ,सीमा

में  ही  सुंदर  होते  हैं  |इनकी  अधिकता  सभी  के  जीवन  में  जहर  घोल  देती  है  “|

[7]

‘दौड़ना’ -‘ एक बेहतरीन योग है’ ,’ फिट  रहने का  प्रभावी उपाय  है’ ,’
‘ह्रदय की धड़क बढ्ने से रक्त की नलिकाओं में लचीलापन आता है’ ,
‘ह्रदय शक्तिशाली बनता है और ह्रदय रोगों की आशंका घट जाती है’ ,
‘कोलेस्ट्रल  कम करके  कार्य करने की छमता  को भी  बढ़ा  देता है ‘|

[8]

‘ख़्वाहिशों  का  गुलाम  हो  गया  है  आदमी ,
‘न मरने देती हैं  और ‘न  जीने  देती  हैं उसे ‘|

[9]

‘कभी मना लो तो कभी मान जाओ’ ,’हिसाब ठीक रहेगा ,’
‘न वो भटकेंगे न हम अटकेंगे’ ,’जिंदगी जी जाएंगे दोनों “|

 

 

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