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नारी रूपी वट -व्रक्ष का धैर्य , साहस, सैयम

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दुनिया मे कौन सा ऐसा वृक्ष है जो एक बार अच्छी तरह से अपनी जड़े मजबूत करने के बाद फिर से अपनी जन्मभूमि से उखाड़ कर दूसरी जगह लगाया जाता है। पौधे तो हर कोई लगाता है और वो बड़ी आसानी से अपनी जड़े जमा लेता है। लेकिन पूरा का पूरा वृक्ष जबकि वो अपनी पकड़ मजबूत कर लेता है।अपनी जड़ों को अच्छी तरह से जमा लेता है, और एक छायादार वृक्ष के रूप मे तबदील हो जाता है, तब फिर से उस छायादार वृक्ष को नई जगह पर रोप दिया जाता है। ताकि वो फलदार बन सके। अपनी छाया से, शीतलता से उन नए फलों को अपने लाड़, प्यार,त्याग और तपस्या से अपनी शाखाऔं का भरण-पोषण करके उन्हे भी एक बेहतर दर्जे का वृक्ष बना सके।और उस वृक्ष को हम सभी जानते है।


जी हाँ, वो है, नारी रूपी या बेटी रूपी वृक्ष एकमात्र एक ऐसा वृक्ष है जो अपनी Original जन्मभूमि से उखाड़ कर दूसरी जगह पे रोपा जाता है। जहाँ पे चल कर उसे फिर से अपनी जड़े स्वयं जमानी है और धैर्य, संयम और साहस का परिचय  देते  हुए  वर्चस्व  कायम  रखना  है।  क्योंकि  उस  नई  जन्मभूमि पर  पहले  से  स्थापित  बड़े-बड़े  दिग्गज  और  फलदार  वृक्ष  अपनी Permanent  मजबूत  जड़े  जमाये  खड़े  है ।  उनकी  क्षत्रछाया  मे  रहकर, उनका  आशिर्वाद  लेकर , उनका  सम्मान  करते  हुए  जो  वृक्ष  आगे  अपनी  मंजिल  की  और  बढता  है  वो  एक  दिन  पुराने  वालों  की  जगह ले  लेता  है ।
जो  नया  वृक्ष  अपनी  पहली  जन्म  भूमि  की  जड़  पकड़े  रहता है  वो  कभी  भी  एक  छायादार  पेड़  के
  रूप  मे,  उत्तम  फलदार  के  रूप  मे अपने  आप  को  स्थापित  नही   कर  पाता ।  


क्योंकि  वहां  से  तो  उसकी  जड़े  हमेशा  के  लिए  उखड़  चुकी  है  और  वो जड़े  अब  एक  नई  जगह  पर  रोपित  की  जा  चुकी  है। तो  फिर  जो  जड़ एक  बार  अपनी  जगह  से  उखड़  कर  दूसरी  नई  जगह  पर  लगाई  जा चुकी  हो  तो  फिर  ये  तो  स्वाभाविक  सी  बात  है  कि  उस  वृक्ष  का  उद्दार तो  नई  जन्म्-भूमि  पर  ही  होगा । पहली  वाली  जगह  पर  तो  उसका अब  कुछ  भी  नही  बचा  है । क्योकी  वहाँ  से  तो  उसे  जड़  सहित  उखाड़ कर  नई  जगह  पर  रोप  दिया  गया  था । इसलिए  अब  इस  वृक्ष  का  वहाँ से  कोई  लेना-देना  नही  है । यदि  फिर  भी  कोई  वृक्ष  अपनी  पुरानी  जगह  जमने  की  कोशिश  करेगा  तो  वो  नादान  है ,नासमझ  है,  वो स्वयं  अपने  पैरों  पर  कुल्हाड़ी  मार  रहा  है । जिसका  सारे  संसार  मे  कोई ईलाज  नही  है । वो  वृक्ष  कही  भी  अपनी  जड़  नही  जमा  सकता । क्योंकि  वृक्ष  तो  एक  ही  है ।और  एक  ही  जगह  पर  जम  सकता  है ।


और  सबसे  अहम्  बात  है  कि  जो  नई  जन्म्-भूमि  है  वो  इस पृथ्वी  पर  रहने  वाले  मनुष्यों  ने  नही  बनाई । ये  तो  ऊपर  वाला  तय करता  है । और  जो  ऐसा  नही  करता  है  वो  उस  ऊपर  वाले  का  भी अपमान  करता  है  और  समय  से  पहले  बहुत  जल्दी  सूख  जाता  है  और   वर्चस्व  स्वंय्  अपने  हाथों  से  समाप्त  कर  लेता  है। वो  तो  अब सिर्फ  और  सिर्फ  नई  जगह  पर  ही  फल-फूल  सकता  है,  जहाँ  अब उसकी  जडें  हमेशा- हमेशा  के  लिए  रोपित  की  जा  चुकी  है ।  अब   यही  उसकी जन्मभूमि ,  कर्म-भूमि  और  फल-भूमि  है ।


यही  सृष्टि-चक्र  है ।
यही  सृष्टि  का  नियम  है ।
जो  इसका  उल्न्घन  करता  है ,  वो  कभी  सुखी  नही  रह  सकता ।

“जय श्री राधे कृष्णा”
“जय श्री राम”
“हर हर महादेव”

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