Home कविताएं ‘ नव वर्ष ‘ पर कुछ छंद जो हमारे तुम्हारे हैं ‘ !

‘ नव वर्ष ‘ पर कुछ छंद जो हमारे तुम्हारे हैं ‘ !

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[1]

‘भ्रष्टाचार  और  आतंकवाद’  नववर्ष  से  ‘बिदाई  कराने  का  संकल्प  लो ‘,
‘देश  की  शान  प्रतिष्ठित  कराओ ‘,’ ओछे  हथकंडे  अपनाना  छोड़  दो ‘|

[2]

देश  के  राजनीतिज्ञों  से  अनुरोध !

‘कभी  तो  स्वकल्याण  गौण  करके  जन -कल्याण  की  सोचो’,
‘उन्हीं  से  तुम्हारी  शान  है  यह  बात  भूल  गए  तो  तुम’|

[3]

‘बंधे  हाथ  करके जिएंगे  तो’ ‘जीवन  आनंदमय  गुजर  जाएगा’, 
‘अकेला  तो चना  भी  भुन  नहीं  पाता’ ‘सभी  फैक  देते  हैं उसे’ |

[4]

‘जो खुद को नहीं समझता’ 
‘दुनियाँ को बेहूदी मान कर चलता है’, 
‘पहले खुद को जान लो ‘
‘फिर जो भी होगा वो भी देखा जाएगा’ |

[5]

‘देश को पुरुषार्थों को जरूरत है’ ,
‘जो देश को उन्नति के शिखर पर ले जाएँ ,
‘तूफानी और हिम्मती लोग आगे बढ़ें’ ,
‘अब कमजोर दिलवालों के जमाने लद गए ‘|

[6]

‘आप सबसे मधुर संबंध बनें रहें ‘,
‘आप सबको मेरा नमन ‘,
‘जीवन प्यार से कट जाएगा’ ,
‘बस इतनी तमन्ना है ‘|

[7]

नव वर्ष 
‘उलझनों से उलझना नहीं चाहता, सिर्फ मुस्कराते रहने की तमन्ना है’ 
‘प्रभु  ऐसी  कृपा  कर  दो , किसी  न  किसी  के  काम  ही  आता  रहूँ’|

[8]

‘जब आपकी दुआओं का खजाना साथ है,
‘फिर चिंता किस बात की ‘?
‘हौसला अफजाई भी खूब होती है’ ,
‘नत-मस्तक हूँ मैं सबके लिए ‘|

[9]

‘अगर तू  तैराक नहीं  तो पानी  में उतरना बेमानी  है ‘,
‘दूसरे के कंधे पर बंदूक चलाना समझदारी नहीं होती ‘|

[10]

‘खुद बदबूदार होते हुए भी सबको बदबूदार समझते हो’,’बड़े नादान हो’, 
‘कुछ  कहने  से  पहले  खुद  में  झांक  लेते,’सही माजरा  समझ  जाते ‘|

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