Home कविता “धीरे हंस , ज़ोर से हंस, ठहाका मार कर हंस ,बस सदा हंस “|

“धीरे हंस , ज़ोर से हंस, ठहाका मार कर हंस ,बस सदा हंस “|

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“हँसना’ – ‘ रक्त   में   प्रतिरक्षा   छमता  में  ‘ ‘ निश्चित   बढ़ोतरी  करता  है’ ,
“हँसना ‘,’खिलखिलाता  चेहरा’, ‘दूसरों  को  बरबस अपनी ओर खींचता है’ ,
‘धीरे  हंस’ , ‘ज़ोर  से  हंस ‘ या ‘ ठहाका  मार  कर  हंस ‘ ,’ बस  सदा  हंस ‘ ,
“सिर  से   उलझनों   की  गठरी   उतर  जाएगी ” , ” जिंदगी  जी  जाएगा ” |

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