Home धर्म धर्म

धर्म

1 second read
0
0
1,284

‘धर्म ‘–‘  एकता    पैदा    करने    का    जरिया    है ‘  , ‘ लड़ने   का   नहीं ‘ ,

‘विविधताओं   के  रूपों   को ‘, ‘समरस’  व ‘ एकता ‘ का  ‘ प्रारूप  बनाओ ‘,

‘रंग- बिरंगा    भारत ‘, ‘ मत-  विभिन्नता    से’  ‘ कभी    घबराता    नहीं ‘,

‘हिंदुस्तानियत   का   रंग ‘ ,’ हर  मजहब  में  ‘  ‘अपनी   छटा   बिखेरता   है ‘  |

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In धर्म

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…