Home धर्म ‘अगर कड़ुवे वचन बोलते रहे’ तो ‘ प्रभु की कृपा’ ‘ घटने लगती है’

‘अगर कड़ुवे वचन बोलते रहे’ तो ‘ प्रभु की कृपा’ ‘ घटने लगती है’

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‘अगर कड़ुवे वचन बोलते रहे’ तो ‘ प्रभु की कृपा’ ‘ घटने लगती है’ ,
‘मीठे वचन’ ‘सबके मन को तृप्त करते है’ ,’ मन शांत होता है’ ,
‘खुद को’ ‘प्रभु पर न्योछावर कर’ ,’किसी दुःखी मन को राहत दे’ ,
‘भूले को’ ‘ सही रास्ता दिखा’ , ‘प्रभु’- ‘सभी को’ ‘तेरा प्यारा बना देगा ‘ |

‘तूने’ ‘ भगवान के स्वरूप बदल डाले’ , ‘गुरु बदल डाले’ ,’ धर्म भी बदला’ ,
‘कभी नहीं सोचा’ ‘रोज़ गलत काम करता हूँ’ ,’खुद को भी बदल डालूँ ‘,
‘गजब की फितरत है आपकी जनाब’ ,’सरेआम खुद को कत्ल करते हो’ ,
‘दया धर्म’ ‘कुछ भी नहीं’ ‘ तेरे वजूद मे’ , ‘कब इन्सान बनेगा तू’,’ये तो बता’ |,

‘कभी न मन का दीप जलाया’ ,’ न राम का नाम लिया’ ,
‘न गुरु के चरणों मे बैठा’ ,’ न सत्संग का रंग चढ़ाया’ ,
‘चार चौरासी के चक्कर मे मैंने’ ,’अपना सारा जीवन गँवा दिया’ ,
‘देख बुढ़ापा’ ‘ समझ मे पाया’ , ‘अब चिड़िया चुग गयी खेत’ |

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