Home धर्म धर्म – सदगुरू

धर्म – सदगुरू

0 second read
0
0
1,283

‘ज्यों अतिथि  के  बिना  आँगन ‘ , ‘पानी  के  बिना  नदी  बेकार  है ‘,

‘पैसे  के  बिना  पाकेट ‘ तो  ‘सदगुरू  बिना’‘हमारा  जीवन  बेकार  है’ ,

‘जीवन  में  एक  गुरु  ज़रूरी  है’ , ‘गुरु  नहीं’  ‘तो  जीवन  शुरू  नहीं ‘ ,

‘सदगुरू  बड़े  शिल्पी  होते  हैं ‘ , ‘पत्थर  को  नारायण बना  देते   हैं ‘ |

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In धर्म

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…