Home ज़रा सोचो ‘दौलत की तलाश में ताजिन्दगी ‘,’ घन चक्कर बना घूमता रहा

‘दौलत की तलाश में ताजिन्दगी ‘,’ घन चक्कर बना घूमता रहा

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‘दौलत की तलाश में ताजिन्दगी ‘,’ घन चक्कर बना घूमता रहा’ ,
‘जब संतोष-धन ‘ से ‘संपर्क साधा’ , ‘जीने का सलीका आ गया’ |

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