Home कविताएं दोस्तों ! कुछ अपनी कुछ तुम्हारी जिंदगी से सीखें !

दोस्तों ! कुछ अपनी कुछ तुम्हारी जिंदगी से सीखें !

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[1]

मित्र 
‘यदि मित्र खुश रहें तो हम भी उनकी कृपा के पात्र बन जाएंगे ,’
‘जब  उदासीनता  घेर  लेती  है  उन्हें ,’ अधमरे  रहते  हैं  हम ‘|

]2]

‘ मित्रों  ! इंसान  पर  कुकर्म  अपना  प्रभाव  निश्चित  डालते  है ,’
‘अपने कर्मों को सुधारो अन्यथा ,’अधोगति का रास्ता है केवल ‘|

[3]

‘दिल’ और ‘धड़कन’ तो ‘मोहब्बत ‘और ‘मौत’ की अमानत समझ ,’
‘मोहब्बत’ के  कब्जे  में  दिल  है  तो ,’मौत’ धड़कनों  पर  भारी  है’|

[4]

‘प्रभु!मित्रों को मुस्कराने की सज़ा दे दो’ ,’ऊल्झने समेट लो उनकी ,’
 ‘  सबकी  पताका  सूरज  की  तरह  फहरे ‘ , ‘आनंद  ही  आनंद  हो  ‘|

[5]

‘तुमसे कुछ नहीं चाहिए बस हाले दिल  बयां कर  दिया करो’ ,
‘हम  समझेंगे  खुदा  ने  रहमत  का  पिटारा  खोल  दिया  है |

[6]

‘सच्चाई  ढूंढ  या  अच्छाई  ढूंढ ‘,’सब  तुझमें  समाया  है ,’
‘इसके लिए कहीं  मत जा ‘,ढूँढता रह जाएगा चारों तरफ ‘|

[7]

“मेरा विचार “–
” झूठे   और   मक्कार   लोगों   से   घिरे   रहने   की   बजाय ‘ अकेला   बैठना ‘ और 
‘जीवन   का   आनंद   लेना ” ज्यादा   श्रेयकर   है ” |

[8]

‘आज जीव-होश संभालते  ही  इच्छाओं  के  भँवर  में  फँसता  चला  जाता  है ,’
‘स्थायी शांति उपलब्ध नहीं हो पाती’,’अनमोल जीवन की बाज़ी हार जाता है’ |

[9]

‘दम  तो  भरता  हूँ  हरदम’ ‘तेरा  साथ  निभाने  का ,’ 
‘रास्ते में दम फूल जाता है ‘,’आगे बढ्ने ही नहीं देता “|

[10]

‘जहां  अपनापन  है  जख्म  भी  वहीं  दिये  जाते  हैं ,’
‘जहां अपना  नहीं कोई ,जख्म  कहाँ से आयेंगे बता ‘|

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