देश की ज़रूरत

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‘हमारे   कई    नेता ‘ , ‘लोग ‘, ‘साधू-संत’  ,’ भ्रष्टाचार   की  सज़ा    भुगत  रहे  है  ‘ ,

‘नए  घोटाले’  , ‘ नई   चालें ‘ ‘ रोज़     खुलती   हैं ‘, ‘पन्ने   रोज़  खबरें  सुनाते   हैं ‘ ,

‘लगता    है   देश    मैं ‘  ‘ संस्कारों   का   दाह-संस्कार ‘   ‘हो   गया   है   आजकल ‘,

‘देशवासियों’  ,’ तुरंत   कानूनी  कार्यवाही ‘ , ‘फौरन  सज़ा ‘,  ‘अब  देश  की  जरूरत  है ‘ |

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