Home कविताएं देशभक्ति कविता देश का स्वाभिमान कलंकित मत करो —

देश का स्वाभिमान कलंकित मत करो —

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‘राजनीतिज्ञ ‘ !’शहादत  पर  सियासत’  करने  का  ‘जुल्म  खुलेआम   करते  हैं ‘,

‘ऐसे  गद्दारों  को ‘ ‘सबक  सिखाने  के सख्त  कानून’  ‘क्यों   नहीं  बनते  देश  में ‘,

‘भारत  की  ताकत’  को ‘बांटने  की  हिमाकत’ करने  का  ‘किस  को अधिकार  हैं,’

‘अभिव्यक्ति  की  स्वतन्त्रता  का  मतलब’,’देश  का स्वाभिमान कलंकित करना  नहीं’ | 

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