Home कोट्स Motivational Quotes ‘दुःख’ मान कर ‘दुम’ हिलाओगे तो ‘टूट’ जाओगे |कुछ छंद जीवनोपयोगी हों शायद सबके लिए |

‘दुःख’ मान कर ‘दुम’ हिलाओगे तो ‘टूट’ जाओगे |कुछ छंद जीवनोपयोगी हों शायद सबके लिए |

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[1]

जरा सोचो
यदि  कोई  ‘गहरी संवेदना’ और  ‘विलक्षण  कल्पना  शक्ति’ प्रदर्शित  करता  है,
बहुत  कुछ  ‘ सीख ‘  लेते  हैं, ‘इतिहास’  रचने  की  ‘वकालत’  करते  लगते  हैं !

[2]

जरा सोचो
हम  वह ‘धधकते  शोले’  हैं  जो,  ‘बुझी आग’ में  ‘आग’ लगा देते  हैं,
‘हाथ  से  हाथ’ मिला  कर आगे  तो  बढ़, ‘आग’  खुद  लग  जाएगी !

[3]

जरा सोचो
‘दरिया’- आंधी  तूफान, कंकड़  पत्थर, से  टकराता  बेखौफ  ‘बहता’  है,
जानता  है  ‘समंदर’ खारी  है, ‘मीठे  पानी’  की  जरूरत  है, जल्दी चलो !

[4]

जरा सोचो
‘अकेले’ होते  हुए  भी ‘मुस्कुराए’  जाना  ‘आंतरिक’ अभिव्यक्ति  है,
शायद  ‘ इश्क  के  झोंके ‘ ‘ मस्त ‘  होने  का  आदेश  देते  हों !

[5]

जरा सोचो
‘ दुख ‘ मानकर  ‘ दुम ‘  हिलाओगे ,  पूरी  तरह  से  ‘टूट’  जाओगे,
‘आनंद’ में होकर ‘आनंद’ लुटाओगे, ‘प्रेम के आगोश’ में आ जाओगे !

[6]

जरा सोचो
‘सबक’  वह  हलचल  है  जो  ‘आदमी’  को ‘बदल’  डालता  है,
‘सुख’  हो  या  ‘दुख’  कुछ  ‘सबक’  जरूर  देकर  ही  जाते  हैं !

[7]

जरा सोचो
‘मन’  की  ‘स्थिरता’  और  ‘तन’  का  ‘चलायमान’  रहना  जरूरी  समझ,
‘स्वस्थ  श्रेणी’  के  प्राणी  के  यह  ‘प्राण’  हैं,’ कोताही’  कभी ‘उत्तम’  नहीं !

[8]

जरा सोचो
ध्यान  रखिए – हमें  ‘ करीबी ‘  मंजूर  है , ‘ नजर अंदाजी ‘  नहीं,
‘करीब’ आओ  कि ‘दिल’ मचलता  है, तुम्हारी ‘तलब’  है  हमको !

[9]

जरा सोचो
न  खुद  ‘सुधरोगे’  न  कभी  अपनी  ‘गल्ती’  सुधारोगे,
‘रिश्ते’  कहां  बच  पाएंगे  ? ‘नाव’  बीच  में  ही  डूबेगी !

[10]

जरा सोचो
‘कुकर्मों’ से  बचे  रहे  तो  समाज  के ‘स्वयंसेवक’  भी  बन  सकते  हो,
‘सुमिरन’  करो  या  मत  करो , ‘ कर्मों  का  फल ‘  मिलता  जरूर  है !

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