Home कविताएं धार्मिक कविताएँ तूने’ ‘ भगवान के स्वरूप बदल डाले’ , ‘गुरु बदल डाले’ ,’ धर्म भी बदला

तूने’ ‘ भगवान के स्वरूप बदल डाले’ , ‘गुरु बदल डाले’ ,’ धर्म भी बदला

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‘तूने’ ‘ भगवान के स्वरूप बदल डाले’ , ‘गुरु बदल डाले’ ,’ धर्म भी बदला’ ,
‘कभी नहीं सोचा’ ‘रोज़ गलत काम करता हूँ’ ,’खुद को भी बदल डालूँ ‘,
‘गजब की फितरत है आपकी जनाब’ ,’सरेआम खुद को कत्ल करते हो’ ,
‘दया धर्म’ ‘कुछ भी नहीं’ ‘ तेरे वजूद मे’ , ‘कब इन्सान बनेगा तू’,’ये तो बता’ |,

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