Home ज़रा सोचो ‘तुम खुद कितने पानी मे हो ‘ ‘ये हिसाब भी देखो’ |

‘तुम खुद कितने पानी मे हो ‘ ‘ये हिसाब भी देखो’ |

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काम’ , ‘क्रोध’ , ‘मद’ , ‘लोभ ‘  से  ‘बचने   का  प्रयास   क्यों  नहीं  करते ‘ ?

‘शुभ-  कर्म   करते   रहने   की   लालसा ‘ , ‘हर  घड़ी   मन   में  जगाए   रख ‘ ,

‘तू   क्या   कुमति   है ‘ ?  ‘जो   दूसरों   की   थाली   में   झाँकता   रहता    है ‘,

‘तू’  ‘खुद’  ‘कितने  पानी   में  हो ‘ ? ‘इसका  हिसाब  लगाकर  देख  तो  सही ‘ |

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