Home कोट्स Motivational Quotes ‘झूठ’ में भी ‘मिलावट’ ,अच्छा होता ‘कडुआ सच’ बोल देते, ‘दोस्ती’ बनी रहती |

‘झूठ’ में भी ‘मिलावट’ ,अच्छा होता ‘कडुआ सच’ बोल देते, ‘दोस्ती’ बनी रहती |

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जरा सोचो
कोई  जब  हमें  ‘ याद ‘  नहीं  करता ,  फिर  हम  ‘ क्यों ‘  करें ?
सभी ‘भूल’ जाते  हैं, ‘रिश्ते’ निभाने  में  कभी ‘मुक़ाबला’ नहीं  होता !

[2]

जरा सोचो
मैं  ‘किसी’  को  रोकने  की ‘ जबरदस्ती ‘ कभी  नहीं  करता,
‘स्नेह’  है  तो ‘स्नेहावश’ रुकें,  दिल  से ‘स्वागत’  है आपका !

[3]

जरा सोचो 
‘झूठ’  में  भी  ‘मिलावट’,  तुम  कितना  ‘मीठा झूठ’  बोलते  हो,
‘अच्छा’  होता  ‘कड़वा  सच’  बोल  देते, ‘दोस्ती’ तो  बनी  रहती !

[4]

जरा सोचो
‘जीवन  जीना’  एक  कठिन  परीक्षा  है, सबके  ‘प्रश्न’  विभिन्न  मिलते  हैं,
‘कई’  दूसरों  की  ‘नकल’  करने  में  माहिर  हैं ,  परंतु  ‘फेल’  मिलते  हैं !

[5]

जरा सोचो
‘स्थिर  पानी’ की  ‘शुद्धता’ खतम, ‘पडे  लोहे’  में  जंग, ‘खाली  दिमाग’  शैतान,
‘सक्रिय’  बने  रहने  की  ‘कसम’  खाओ , ‘समुन्नत’  जीवन  का  प्रयास  रखो !
]6]
जरा सोचो
‘दुखी’  होते  तो  ‘हॉस्पिटल’  में  मिलते , या  ‘दुखों  के  गीत’  गाते,
तुम  बड़े  ‘ मस्तीखोर ‘  लगते  हो, हर  बात  पर  ‘ मुस्कुराते ‘  हो !
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जरा सोचो
आलीशान  ‘बंगला’  बनाया, रहने  लगे, बहुत  ‘अच्छा’  किया,
जब  किसी  के  ‘दिल  में  जगह’ बनाओगे  तो  ‘जानेंगे’  तुम्हें !
[8]
जरा सोचो
‘खुशियों’  को  अपने  अंदर  ही  ‘ढूंढ’,  ‘दुनियां’  में  क्यों  भरमाया  है  ?
बाहर  ‘बेहूदगी  के  बवंडर’  हैं, ‘अंतर्मन’  खुशी  का  ‘अतुल  भंडार’  है !
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जरा सोचो
जब  भी  तुम  ‘रूठे’  हम  सदा  ‘टूटे’, ‘खिलौने ‘  हैं  आपके  हाथों  के,
कभी  ‘मनुहार’  करके  ‘मना’ भी  लेते,  क्या  ‘बिगड़  जाता’  हजूर !
[10]
जरा सोचो
किसी  से  ‘लगाव’  है   तो  ‘घाव’  मिलने  सुनिश्चित   है,
‘अपने’ ही  बिना  समझे  अब ‘अपनों  को’ नकार  देते  हैं !
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