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‘ज्ञान के प्रकाश ‘ का परचम लहराओ !

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‘संग्रह ‘ करनेवाला ‘ कभी संसार मे’ ‘शांति प्राप्त नहीं करता’
”संचित करो’, ‘प्रभु का पात्र बन कर,’ ‘उसकी कृपा’ केवल ,
‘अंधेरे को मिटाते चलो’, ‘प्रभु की’ ‘दया का भंडार ‘ पाते रहो ,
‘प्रकाश का उत्सव’ मनाओ , ‘ज्ञान के प्रकाश’ का ‘परचम लहराओ ‘ |

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