Home कविताएं प्रेरणादायक कविता जो न समझे वो अनाड़ी है !

जो न समझे वो अनाड़ी है !

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‘कर्मों    की   आवाज़ ‘  ‘पत्थरों  में  सुराख ‘  करने   की  ‘कुव्वत  रखती  है’  ,

‘न  आलोचना  कर’ ,’ न  दे  नसीहत   किसी   को’ , ‘न  कर्म   फल   पर  जा ‘,

‘चुप   रह   कर  अपनी  आलोचना  सुन’ ,’ सुधरने   का    प्रयास  जारी  रख ‘,

‘वो’  ‘बड़ा  कृपा – निधान  है  ‘ , ‘इंसानियत ‘ की  ‘सुगंध  से  भर  देगा  तुझे ‘ |

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