Home कविताएं ‘जीवन के ताने-बने कुछ तेरे कुछ मेरे ‘!

‘जीवन के ताने-बने कुछ तेरे कुछ मेरे ‘!

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[1]

‘मैं  कुछ  कह  नहीं  पाती’ ,
‘उन्हें  महफिलों  से  फुर्सत  नहीं’,
‘मेरी  तन्हाई  मेरी  जवानी  को’,
‘उजाड़  कर  रख  देगी  इक दिन ‘|

[2]

‘जितना  कठिन  संघर्ष  करोगे’ ,
‘परिणाम  उतना  ही  आनंदमयी  होगा’,
‘कर्म  से  बचाने  का  प्रयास  तुझे ‘,
‘किसी  काम  का  नहीं  छोड़ेगा ‘|

[3]

‘सुंदर  शब्दों  का  प्रयोग’ सबको  बांधे  रखता  है ‘,
‘चेहरा सभी भूल जाते हैं ‘,’शब्द भूले नहीं जाते कभी ‘|

[4]

‘जब  तक  माँ-बाप  जिंदा  हैं ‘,
‘जन्नत  का  मज़ा  है ‘,
‘उनकी  छाया  खतम  तो’ ,
‘तेरी  जन्नत  भी  खतम ‘|

[5]

‘वे  सदा  द्वेष  में  जीते  रहे ‘,
‘तुम्हीं  स्नेह  दिखा  देते ‘,
‘न  वे  झुके  न  हम  झुके’,
‘अपनापन  नहीं  आया ‘|

[6]

‘उलझनों से  पार  पाने  का  रास्ता’ ,
‘कोई  तो  बताए  हमें ‘ ‘
‘मुस्कराने को ‘जी’ चाहता  है’,
‘उदासी  जा ती  ही  नहीं ‘|

[7]

‘यदि  मन  पवित्र  बना  रहे  तो’,
‘पावन  तीरथ’  समझ  खुद  को ‘,
‘गर  कुविचारों  से  भरा  है  मन  तो ‘,
‘चौरासी  योनियों  में  ही  भटकेगा ‘|

[8]

‘अगर  हम  झुक  गए  तो  बुज़दिल  मत  समझो  हमें’, 
‘रिस्ते’ सही सलामत बनाए रखने का ,’हुनर है जनाब ये ‘|

[9]

‘इत्र’  माहौल  को  महकाए  बिना  रुकता  नहीं ‘,
‘मित्र’  मित्र को  खुशनुमा देखे बिना  सोता नहीं ‘|

[10]

‘ चिकनी- चुपड़ी  बातें  ” फ़ितरतों  का  खजाना  हैं ‘,
‘मीठेपन का लेप ‘ कौन जाने’ ,’कब क्या कर बैठे हुज़ूर ‘?

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