Home कविताएं “जीवन के अलग अलग विधाओं पर छंद ! विचारें और ध्यान दें “|

“जीवन के अलग अलग विधाओं पर छंद ! विचारें और ध्यान दें “|

2 second read
0
0
1,001

[1]

” प्रसन्नचित्त , हंसमुख  रहने  वाले  का  शरीर  व  स्वास्थ्य  सही  रहता  है ” ,
“भावुक,क्रोधी एवं तनावग्रस्त व्यक्ति का”” स्वास्थ्य अक्सर बिगड़ जाता है” ,
“मनोभाव” “हमारे स्वास्थ्य और शारीरिक क्रियाओं की  दशा  बदल देते  है” ,
“बोर होना”,”तनाव या अवसाद” व “क्रोध”,”सबकुछ गड़बड़ कर डालता है” |

[2]

” ज्यादा  बोर  होने  से  जीवन  शुष्क  होता  है ” ,”  चिड़चिड़ापन  बढ़  जाता  है ” ,
“आँखों की चमक’ व ‘चंचलता’ ‘खत्म  हो जाती  है” ,”अरुचि  सवार  हो जाती  है” ,
“हर परिस्थिति” ,’ काम’ एवं ” बात का” “आनंद उठाईए”,”अजी बस मुस्कराइए ” ,
“मुस्कराता चेहरा” “सभी  के आकर्षण का  केंद्र  होता  है” “,बरकरार  रखिए  उसे “|

[3]

”  प्रत्येक  सुबह  को  अपना  पुनर्जन्म   का  काल  मानो  “,
” बीते  दिनों  के  बुरे  छणों  को  ” ” तिलांजली  देते चलो ” ,
“अपने  वर्तमान  को’ ” बेहद  रोमांचक  लय  में  बिताओ “,
“निश्चित रूप से””जीवन खुशनुमा माहोल में जी जाओगे” |

[4]

” चिंताग्रस्त  और  दुःखपूर्ण  जीवन ” ” केवल  अंधकार  में  ही  धकेलता   है ” ,
” बहता पानी कभी नहीं सड़ता”,”तू  भी अपना जीवन गतिमान  बनाए  रख” ,
” अगर जीवन में प्रेम”,’आकर्षण व आशा’ ‘ निकल  गयी’,”फिर  क्या  बचा” ?
” हम  दुःखों  का  समाधान  नहीं  खोजते “, ” इसिलिए  सुखों  का अभाव  है ” |

[5]

” ख़्वाहिशों   का  अंत  नहीं  होता “,” इन्हें  घटाते  चले  जाइए” ,
“न  हैरान  हों न  परेशान  हों” ,’हर  जिन्स  मुस्कराना  चाहिए” ,
“सामने  वाला  कुछ भी  कहे “,”बरगलाना, बौखलाना छोड़ दो” ,
“मन अगर फुर्सत में हो तो”,”खुद को जानने की कोशिश करो” |

[6]

बदकिस्मती के ताले पर ” “कर्म की चाबी लगा” , “खुल जाएगा ” ,
“हर पकी डाल तेरे हाथ में आये”,” ऐसा कभी हो ही नहीं सकता “|

[7]

“हमेशा  खुश  रहने  के  लिए” “अपनी  अच्छी  यादों  को सहेज  कर  रक्खें” ,
“बुरे को भूल  कर  सदा  अच्छी  बातों  को” ” याद  करने की  कोशिश  करो” ,
“भागदौड़  भरी  जिंदगी  में सभी  को” “परेशानियों से दो-चार होना होता है “,
“खुशियाँ  सदा  बांटने  से बढ़ती  हैं ” “और  दुःख  बांटने  से सदा  घटता  है” |

[8]

“अपने आसपास नज़र दौड़ाये “,”अनेक लोग नकारात्मक जाल में फंसे होंगे” ,
“हर तरह की  सुविधा के  बावजूद “,” उनके  चेहरे पर  मायूसी  नज़र आएगी” ,
“कमजोर  सोच  के  कारण  वो” ” अच्छी  बातों पर भी खुश  नहीं हो  पाते  हैं “,
“ऐसे  जमावड़े से  उचित  दूरी  बना कर जीना “,” विफल नहीं होने देगा कभी” |

[9]

“जीवन में दुःख  आयें  या सुख आयें” ,” इससे कुछ लेना -देना नहीं किसी का “,
“जीवन सीधा है” ” जिस पात्र में रक्खोगे “”उसका स्वरूप वैसा ही बन जाएगा “|

[10]

“जीवन  को  आनंद  में’ ,’ ऐश्वर्य  में’ , ‘सफलता  में ‘,’ संगीत  रूप  में  जीयेँ ‘,
‘निराशा’ , ‘असफलता’ ,’ विपत्ति ‘ के ‘ रूप  में  जिओगे’ तो ‘आंसूँ  बहाओगे ‘ |

 

 

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…