Home कविताएं धार्मिक कविताएँ जिस प्रकार कमल’ – ‘कीचड़ मे होते हुए भी’ ‘ न्यारा होता है

जिस प्रकार कमल’ – ‘कीचड़ मे होते हुए भी’ ‘ न्यारा होता है

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‘जिस प्रकार कमल’ – ‘कीचड़ मे होते हुए भी’ ‘ न्यारा होता है’ ,
‘ज्ञानी ग्रहस्थी’ –‘जिम्मेदारियाँ निभाते हुए’ ‘महामाया मे नहीं फँसता’ |

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