Home कोट्स Motivational Quotes जहां ‘साहस’ नहीं वहाँ ‘लक्ष्य’ कैसा ? ‘ढुलमिल नीति’ काम नहीं करती | प्रेरणादायक कुछ छंद |

जहां ‘साहस’ नहीं वहाँ ‘लक्ष्य’ कैसा ? ‘ढुलमिल नीति’ काम नहीं करती | प्रेरणादायक कुछ छंद |

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जरा सोचो
जहां  ‘साहस’  नहीं  वहां  ‘लक्ष्य’  कैसा ? ‘ढुलमुल  नीति’  काम  नहीं  करती,
जो  ‘उलझनों’  से  टकराया, कभी  हारा  नहीं, परचम  उसी  का  लहराया  है !
[2]
जरा सोचो
किसी  भी  ‘काम’  से  जुड़ें , ‘ बुरे  परिणामों’  का  संकेत  मिलने  लगता  है,
‘प्रतिभावान’ व्यक्ति  डगमगाते  नहीं, ‘मंजिल’ पाकर  सुखद ‘आश्चर्य’ देते  हैं  |
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जरा सोचो
‘ श्रेय ‘  पानी  की  ‘ होड ‘  से  बचें , ‘ प्रेरक ‘  की  भूमिका  निभाएं,
इसमें ‘ठहराव’  की गुंजाइश  नहीं  होती, यही ‘श्रेष्ठता’ का प्रतीक  है !
]4]
जरा सोचो
जो ‘हमारे पास’ है ‘स्वीकारते’ नहीं, ‘जो नहीं है, उसका ‘पीछा’ छोड़ते नहीं,
‘ अधूरी  ख्वाहिशों ‘  का  दर्द , ‘ आंतरिक  खुशियों ‘  से  दूर  कर  देता  है !
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जरा सोचो
जब  किसी  के  ‘हमदर्द’  बनोगे, तभी  तो  ‘दर्द’  निकलेगा,
‘फफूलों’  को  ‘स्नेह  का  मरहम’  लगाने  की  जरूरत  है !
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जरा सोचो
‘कायर’ ‘क्षमा’  नहीं  मांगता,  ‘निडर’  इसमें ‘देर’  नहीं  करता,
‘पहला’  अहंकार  का  मारा, ‘दूसरा’ आत्मविश्वासी  प्राणी  है !
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जरा सोचो
‘ ज्ञान  चक्षु ‘  होते  हुए  भी  ‘ कमजोर  सोच ‘  रखते  हो ,
कुछ ‘खूबसूरती’ से सोचोगे, तभी कुछ ‘अच्छा’ कर पाओगे !
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जरा सोचो
प्यार  से  ‘ रेहड़ा ‘  भी  चलाओगे ,  तो  ‘ पेट ‘  भर  कर  सोओगे ,
‘अहंकार’ सहित ‘हवाई जहाज’ भी चलाया, एक दिन ‘मर’ जाओगे !
[9]
जरा सोचो
जोश, जज्बा, जुनून, का ‘मालिक’ कभी ‘खाली’ नहीं रहता,
जो ‘ठाना’ वही कर बैठा, ‘समाज’ का अग्रसर ‘प्राणी’ बना !
 
[10]
जरा सोचो
‘उदासियों’ और  ‘निराशा’  के  ‘प्रहार’ सहने  की  क्षमता  जगाओ,
‘प्रोत्साहित’  होकर ‘व्यर्थ-विषयों’  में  फंस  कर  ‘टूट’ मत जाना !
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