Home ज़रा सोचो ‘जरा सोचो’-अपना हित त्याग कर सबका भला सोचो, ‘भगवान’- सबका भला करेंगे ‘

‘जरा सोचो’-अपना हित त्याग कर सबका भला सोचो, ‘भगवान’- सबका भला करेंगे ‘

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जरा सोचो
‘जो  ‘ हार ‘  कर  बैठ  जाते  हैं , ‘ उनकी  ‘ किस्मत ‘  डूब  जाती  है,
‘जो  सदा ‘चलते’ रहते  हैं ,’ सफलता’  उन्हीं  का  ‘वरण’  करती  है’ !

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मेरा विचार
‘खाया   लगेगा   अंग  , दान   रहेगा   संग, बाकी   सबकुछ   जंग , ‘ दौलत   घर   तक , परिवार   शमशान   तक ,
धर्म   जन्मांतर   तक  साथ   देते   हैं   ‘  !   चाहे   जैसा  ‘जी’  लो  इच्छा   है   आपकी   !
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जरा सोचो
‘अच्छा  या  बुरा  लगना , हमारे  एहसास  का  प्रदर्शन  है, बाकी  कुछ  नहीं,
‘समभाव ‘ में  जीने  का ‘आनंद’ ही  कुछ  और  है,’जी’  कर  देखिए  जनाब’ !
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जरा सोचिए
‘ प्रदूषण ‘  न  फैलाना , ‘ हम  सबकी  ‘ जिम्मेदारी ‘  है,
‘ऐसे ‘आनंद  का  लाभ’ क्या ?जब  जीवन ‘खतरे’ में  हो’ !
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जरा सोचो
‘ आपको ‘ बिमारी ‘  चाहिए  या  ‘ सुखद ‘ जीवन  का  आनंद,
‘खुद जीना’ चाहते  हो  फिर, दूसरों  को ‘मारने  में आनंद’ क्यों ?
]6]
जरा सोचो
‘कोई  अपनों  के  ‘हित’  हेतु ,’ स्वप्नों  को  तिलांजलि’  दे  देते  हैं,
‘कोई  ‘सपने’  पूरे  करने  हेतु , ‘अपनों  से ‘कट ‘ कर  ही  चलते  हैं’ !
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जरा सोचो
‘कान्हा’ जब राधा के ‘चक्कर’ में आ गए,’हम तो ‘सामान्य प्राणी’ हैं ,
‘ स्नेह  की  धार ‘  बड़ी  ‘ पैनी ‘  है , ‘ कोई  बच  नहीं  सकता ‘ !
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जरा सोचो
‘कठिन  समय’  में ‘रास्ते’  ढूंढना  उचित  है, ‘बहाना’  नहीं  चलता,
‘ गिरकर’  उठना  फिर  आगे ‘ कदम  बढ़ाना ‘  हीरो  बना  देगा ‘ !
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जरा सोचो
‘कहा  था  कुछ  और  समझ  कुछ  लिया ,’ एहसास ‘  से  मारे  गए,
‘शांत’  रहकर ‘सहन’  कर  जाते  तो, ‘सब  कुछ  ‘ठीक’  ही  रहता’ !
 
[10]
जरा सोचो
‘ जिंदादिल’  इंसान  हो , अपने  हक  को ‘हकीकत’ में  जानते  हो,
‘ दोस्ती  ‘ में ‘सौदा’ नहीं  होता, सिर्फ  ‘एहसास’  की  जरूरत  है’ !
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