Home ज़रा सोचो “जन्म लेते समय के वायदे भूल जाते हैं ” | ‘एक प्रेरक प्रसंग’ !

“जन्म लेते समय के वायदे भूल जाते हैं ” | ‘एक प्रेरक प्रसंग’ !

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जन्म   से  ठीक  पहले  एक  बालक  भगवान  से  कहता  है ,”  प्रभु आप  मुझे  नया  जन्म  मत  दीजिये  ,  मुझे  पता  है  पृथ्वी  पर  बहुत  बुरे   लोग रहते  है …. मैं   वहाँ   नहीं   जाना   चाहता …”  और   ऐसा   कह   कर   वह  उदास होकर   बैठ   जाता   है   ।
भगवान्   स्नेह   पूर्वक   उसके   सर   पर   हाथ   फेरते   हैं   और   सृष्टि   के नियमानुसार   उसे   जन्म   लेने   की   महत्ता   समझाते   हैं   ,  बालक   कुछ   देर    हठ   करता   है   पर   भगवान्   के   बहुत   मनाने   पर   वह   नया   जन्म   लेने      को   तैयार   हो   जाता   है ।

” ठीक   है   प्रभु  ,  अगर   आपकी   यही   इच्छा   है   कि   मैं   मृत   लोक   में  जाऊं तो   वही   सही   ,  पर   जाने   से   पहले   आपको   मुझे   एक   वचन   देना   होगा।  ” , बालक   भगवान्   से   कहता   है  ।

भगवान्  : बोलो   पुत्र   तुम   क्या   चाहते   हो   ?

बालक   : आप   वचन   दीजिये   कि   जब   तक   मैं   पृथ्वी   पर   हूँ   तब   तक   हर एक   क्षण   आप   भी   मेरे   साथ   होंगे ।

भगवान्   : अवश्य,  ऐसा   ही   होगा  ।

बालक  : पर   पृथ्वी   पर   तो   आप   अदृश्य   हो   जाते   हैं   ,  भला   मैं   कैसे जानूंगा   कि   आप   मेरे   साथ   हैं   कि   नहीं   ?

भगवान्   : जब   भी   तुम   आँखें   बंद   करोगे   तो   तुम्हे   दो   जोड़ी   पैरों   के  चिन्ह   दिखाइये   देंगे   ,  उन्हें   देखकर   समझ   जाना   कि   मैं   तुम्हारे   साथ   हूँ ।

फिर   कुछ   ही   क्षणो   में   बालक   का   जन्म   हो   जाता   है  ।

जन्म   के   बाद   वह   संसारिक   बातों   में   पड़  कर   भगवान्   से   हुए   वार्तालाप को   भूल   जाता   है  | पर   मरते   समय   उसे   इस   बात   की   याद   आती   है  तो वह   भगवान   के   वचन   की   पुष्टि   करना   चाहता   है  ।

वह   आखें   बंद   कर   अपना   जीवन   याद   करने   लगता   है  । वह   देखता   है   कि   उसे   जन्म   के   समय   से   ही   दो   जोड़ी   पैरों   के   निशान   दिख   रहे  हैं | परंतु   जिस   समय   वह   अपने   सबसे   बुरे   वक़्त   से   गुजर   रहा   था   उस समय   केवल   एक   जोड़ी   पैरों   के   निशान   ही   दिखाइये   दे   रहे   थे   ,   यह  देख   वह   बहुत   दुखी   हो   जाता   है   कि   भगवान   ने   अपना   वचन   नही निभाया   और   उसे   तब   अकेला  छोड़   दिया   जब   उनकी   सबसे   अधिक   ज़रुरत   थी ।

मरने   के   बाद   वह   भगवान्   के   समक्ष   पहुंचा   और   रूठते   हुए   बोला  , ” प्रभु ! आपने   तो   कहा   था   कि   आप   हर   समय   मेरे   साथ   रहेंगे , पर   मुसीबत  के समय   मुझे   दो   की   जगह   एक   जोड़ी   ही   पैर   दिखाई   दिए  ,   बताइये   आपने   उस   समय   मेरा   साथ   क्यों   छोड़   दिया   ?”

भगवान्   मुस्कुराये   और   बोले   , ”  पुत्र  !  जब   तुम   घोर   विपत्ति   से   गुजर   रहे थे   तब   मेरा   ह्रदय   द्रवित   हो   उठा   और   मैंने   तुम्हे   अपनी   गोद   में   उठा लिया   ,   इसलिए   उस   समय   तुम्हे   सिर्फ   मेरे   पैरों   के   चिन्ह   दिखायी   पड़ रहे   थे  । “

दोस्तों ,  बहुत   बार   हमारे   जीवन   में   बुरा   वक़्त   आता   है  ,   कई   बार   लगता है   कि   हमारे   साथ   बहुत   बुरा   होने   वाला   है   ,   पर   जब   बाद   में   हम   पीछे मुड़   कर   देखते   हैं   तो   पाते   हैं   कि   हमने   जितना   सोचा   था   उतना   बुरा नहीं   हुआ   , क्योंकि   शायद   यही   वो   समय   होता   है   जब   ईश्वर   हम   पर सबसे   ज्यादा   कृपा   करता   है  । अनजाने   में   हम   सोचते   हैं   को   वो   हमारा साथ   नहीं   दे   रहा   पर   हकीकत   में   वो   हमें   अपनी   गोद   में   उठाये    होता   है  ।

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