Home ज़रा सोचो ‘छोटी बातें ‘भी बड़ी गंभीर होती है’ ‘ जरा ध्यान से सोचें ‘ |

‘छोटी बातें ‘भी बड़ी गंभीर होती है’ ‘ जरा ध्यान से सोचें ‘ |

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[1]

‘कभी  सहारा  ढूंढते  हो ,’कभी  उम्मीद  करते  हो ,’गजब  इंसान  हो ‘,
‘खुद  का  सहारा  खुद  बनो ‘,’ कुछ  करो ‘,  ‘ फिर  शान  से  जियो ‘|

[2]

‘हंसने  की  वजह  ढूँढता  है ,
‘बेहियाई  का  नुमाइन्दा  है  तू ‘,
‘बेवजह  हंस  कर  तो  देख ,
‘जिंदगी ‘  गुनगुनाने  लग  जाएगी ‘|

[3]

‘न  जाने  कैसा  तराना  छोड़  गया  है’,’यादों  से  फुर्सत  नहीं  मिलती’ ,
‘अबकी  बार  मिलोगे  तो  अपनी  ज़ुल्फों  में  कैद  कर  लूँगी  तुम्हें ‘|

[4]

‘दिल  दुखा  कर  चल  दिये ‘,’ इस  बात  का अहसास  नहीं  था’,                                                                                                              ‘बेमुरव्वत की  मुहब्बत का  अंजाम,”कभी  अच्छा  नहीं  रहता’ |

[5]

‘आई लव यू’ कहने  का  जमाना  पुराना  है  अब’, ‘कोई  नया  शगुफा  छोड़िए  जनाब’,                                                                              ‘घर  आते  ही  पता  चल  जाता   हैं ,   ‘ आप  कितना  प्यार  करते  हैं  हमसे ‘|

[6]

‘यदि  आपकी  आँखें  स्नेही  हैं ‘,
‘दुनियाँ  से  प्यार  ही  करोगे ‘,
‘भाषा  अगर  सुसंस्कृत  है ‘,
‘दुनियाँ  प्यार  करेगी  तुमसे ‘|

[7]

‘मन  की  शांति  चाहिए  तो  समयानुसार  खुद  को  बदलना  सीखो’,
‘अपने  पैरों  पर  कुल्हाड़ी चलानी  है’ ,तो  यह  अपेक्षा दूसरों  से  क्यों ‘?

[8]

‘भगवान  ने  ‘हाथ – पैर’  और  ‘दिमाग’  दे  दिया  ,  भाग्यशाली  हो ‘,
‘अब  ‘कर्मकार’ बन  कर  अपना  ‘भाग्य” खुद  लिखना  शुरू  कर  दो ‘|

 

 

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