Home कविताएं प्रेरणादायक कविता ‘चन्दन पर’ ‘सांपों का जहर’ ‘चढ़ते नहीं देखा कभी’ |

‘चन्दन पर’ ‘सांपों का जहर’ ‘चढ़ते नहीं देखा कभी’ |

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‘यदि   तू  संस्कारी   है ‘ ,’कुसंगति  में  फंसे  लोग’ ‘ तेरा  क्या  बिगाड़ेंगे ‘ ?

‘चन्दन  के  ऊपर’  ‘सांपों  के  जहर   का  असर ‘, ‘ होते  नहीं  देखा  कभी ‘ |

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