Home ज़रा सोचो ;कोरोना भाग जाएगा ‘– ‘एकता,विश्वास, धैर्य,शांति’ का प्रयास जरूरी है |

;कोरोना भाग जाएगा ‘– ‘एकता,विश्वास, धैर्य,शांति’ का प्रयास जरूरी है |

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जरा सोचो
‘कोरोना’ क्या ‘मोहब्बत’ की  झपकी  है ,’ बिना  बताए  आ  जाता  है,
‘ इसका ‘ कातिलाना  अंदाज ‘  भयानक  है ,  ‘ जरा  ‘ डर ‘  कर  चलें’ !

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जरा सोचो
‘ मतलब  परस्त ‘ आदमी ‘ भय  ग्रस्त ” लगता  है  आजकल,
‘कोरोना के भूचाल’ के कारण, ‘अपनों से ‘मिलने’ में डरने लगे’ !

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जरा सोचो
‘हमारा  ‘रसोई  घर’  सही  ‘आयुर्वेदिक  दवा  घर’  सरीखा  है,
‘कुछ ‘मसालों’ का उचित ‘सम्मिश्रण’, ‘कोरोना’ को हरा देगा’ !

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कोरोना
‘धरती’ पर ‘बेबुलाये  मेहमान’ बनकर  आए  हो,’मेहमान’  की  तरह  रहो,
‘सारा ‘आसमान’  क्यों ‘सिर’  पर  उठाया  है, आराम  से  वापिस  जाओ ‘

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जरा सोचो
‘ सिर्फ ‘अपने लिए’ करना स्वार्थ ,और ‘दूसरों’ हेतु परमार्थ होता है,
‘  निस्वार्थ  भाव  ‘ से  सेवा  तुझे  ,’ भवसागर ‘  से  पार  कर  देगा’ !

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जरा सोचो
‘बिना  हड्डी  की  ‘जीभ’  में  ‘हड्डियां’  छुड़वाने  की  ताकत  है ,
‘यकीन’  नहीं  होता  तो, किसी  से ‘जुबान’  चला  कर  देखिए’ !

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जरा सोचो
‘तुम  कितने  भी  ‘कायर’  हो , ‘ जरूरतें ‘  करौंद  डालेगी  तुझे’,
‘ उठो , आगे  बढ़ो , कुछ  भी  करो , ‘ श्रम ‘  का  आश्रय  लो ‘ !

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जरा सोचो
‘माना  हमारा  ‘प्रारंभ’  और  ‘अंत’  यमराज  ने  ‘लिख  कर’  ही  भेजा  है ,  ‘बीच  के  समय’

क्यों  ना   स्नेह  , विनम्रता ,  विश्वास   और   मुस्कुराहट   से   सजाए   जाए  ‘ !

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जरा सोचो
‘अपनी  ‘गरीबी’  का  एहसास  न  होना, यथार्थ  ‘प्रयास’  न  करना,

‘तरक्की’  में  रुकावट  है ,’आत्मविश्वास’  न  होने  का  प्रदर्शन  है’ !

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जरा सोचो
‘शिथिल  स्वभाव’ ‘जिज्ञासा  रहित  प्राणी’  हाथ  मलते  रहते  हैं,
‘अंधेरे’ में  ही ‘जीते’  हैं, चाहे ‘संसार’  कितना  भी  ‘रोशन’  रहे’ ?

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