Home कविताएं “कुछ सुविचार जो आपके काम आ जाएँ ” !

“कुछ सुविचार जो आपके काम आ जाएँ ” !

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[1]

‘मेरी  ‘मैं’  ने  मुझे  मार  रक्खा  है ‘,
‘ऊपर  उठने  ही  नहीं  देतीं ‘,
‘ये  ही  मेरा  सबसे  बड़ा  शत्रु  है’ ,
‘बुद्धिहीन  हो  गया  हूँ  मैं ‘|

[2]

‘उड़ान  भरने  वाले  एक  दिन  मंजिल  पा  ही  लेते  हैं ‘,
‘ जो  भी  घमण्ड  में   डूबा  धड़ाम  से   नीचे  गिरा ‘|

[3] 

‘जो  आपका  ख्याल  रखता  हो ‘
‘तुम  भी  महत्व  दो  उनको ‘,
‘बाकी  दुनियाँ  का  मेला  है’ ,
‘आज  शुरू  कल  पर  खतम ‘|

[4]

‘बीते  हुए  पल  कभी  लौट  कर  नहीं  आते’,                                                                                                                                                                        ‘और कोई टूटा पत्ता दुबारा पेड़ पर नहीं लगता’ ,
‘फिर  कसमसाकर  जिंदगी  किसलिए  जीना’ ,                                                                                                                                                                    ‘हौसले  से  विश्वास  का  पत्थर  लगाए  जा’|

[5]

‘हठधर्मी  के  सामने  सही  बात  भी  बोनी  रह  जाती  है’ , 
‘शांत रह कर निकल जाना ही उत्तम विधा है उस   समय “|

[6]

‘न  तो  खुद  जलो  और  न  किसी  को  जलाओ’ 
‘नकारात्मक  सोच  कहते  हैं  उसे’, 
‘किसी  को  अपने  स्नेह  से  सींचा  है’                                                                                                                                                                                  ‘सोचने समझने का मौका तो दो उसे’|

[7]

‘हम सोचते थे सब बाग बगीचे हमारे हैं’ ,
‘आँधी सब कुछ उड़ा कर ले गयी पल में’ ,
”झूठी पिपासा में जी रहे हैं सभी प्राणी ‘,,
”सत्कर्म साथ जाते हैं बाकी यहीं पर है ‘|

[8]

‘हर  सुबह  पूछती  है  आज  किन  शर्तों  पर  जीना  है ‘,
‘ हर शाम , दिन  भर  का  तजुर्बा  भेट  करता  है  हमें ‘|

[9]

‘जो  जिस  रूप  में  खुश  हो  उसी  अंदाज़  में  उनके  साथ  खुशी  मनाओ ‘,
‘ चार  दिन  की  चाँदनी  है , मिलती  खुशी  को  समेटते  जाओ ‘|

[10]

‘जहां  चाहत  वहीं  राहत’ जहां  स्नेह  वहाँ  दिल’ हाजिर  है  जनाब ‘,
‘काठ का उल्लू  कब तक  बने रहोगे’,’मुस्कराहट से  घर  को  सज़ा ‘|

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