Home कविताएं ‘कुछ समयानुसार याद करने और जीवन में उतारने के छंद ‘

‘कुछ समयानुसार याद करने और जीवन में उतारने के छंद ‘

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[1]

‘हम  सत्य-असत्य  दोनों  देखते  हैं’,’तीसरी  विवेक  की  आंख  बंद  रखते  हैं’,
‘तीसरी आँख  खुलते  ही  प्रिय-अप्रिय  का  भेद  मिटने  में  देर  नहीं  लगती’|

[2]

‘खुद  को  बुलंद  रखने  के  लिए ,
‘अपनी  खुदी  को  मिटाना  शुरू  कर  दो ‘,
‘स्नेह  में  डूबने  वाले  ही  संसार  को ,
‘सदा  सजाते , संवारते  हैं ‘|

[3]

‘गलत  दिशा  में  बढ़ती  भीड़  का  हिस्सा  बनना  मुनासिब  नहीं ‘,
‘सही  दिशा  में  अकेले  भी  चले  तो  मंज़िल  को  पा  जाओगे ‘|

[4]

‘दहाड़ मार कर तुम किसी को अपनी तरफ नहीं झुका सकते ‘,
‘खामोश रह कर शिकार करना ,’शेरों का तजुर्बा है जनाब ‘|

[5]

‘सदा  अच्छे  ख्वाब  देखते  सोना’ ,’नई  उम्मीद  सहित  उठना ‘,                                                                                                                                    ‘ ‘करिश्माई  चरित्र  है  ये ,’उज्जवल  भविष्य  का  प्रारूप   है ‘|

[6]

‘किसी  को ‘आखिरी  बात  और  आखिरी  रात’  का  कुछ  नहीं  पता ‘,
‘मिलते  जुलते  रहिए  जनाब  , ये  आखिरी  मुलाक़ात  न  हो  कहीं ‘|

[7]  

‘मैं  हूँ ‘ क्योकि  ‘हम  हैं ‘ जनाब ‘,

‘एक  भी  हटा  तो  समझो  सब  कुछ  खतम ‘

[8]

‘जब  भी  इच्छाएं  जागेंगी’ ,  
‘हमारा  जीवन  कष्टमय  ही  होगा ‘,
‘पापानुसार  ही  दण्ड  भोगना  है’ ,
‘ये  ही  प्रारब्ध  है ‘|

[9]

‘हम  जो  चाहें  वो  ना  हो ‘और ‘ जो  न  चाहें  वही  हो  जाए ‘,
‘दुःख  इसी  का  नाम  है ‘,’चाहने –  न चाहने  को  छोड़  दें ‘|

[10]

‘समय   का   सदुपयोग  ‘और  ‘शब्द   नाप   तोल   कर’ बोलना   अच्छा  है ‘,
‘गुज़रा  हुआ   समय  ‘व  ‘मुंह  से   निकले   शब्द  ‘ दुबारा   नहीं   मिलते ‘|

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