Home कोट्स Friendship Quotes “कुछ समझो , जरा सोचो , कुछ विचारणीय छंद ” |

“कुछ समझो , जरा सोचो , कुछ विचारणीय छंद ” |

2 second read
0
0
1,409

[1]

” अपना  सम्मान  चाहो  तो  ” ”  पहले  दूसरे  का  सम्मान  करना   सीखो  “,
“सुख – शांति  का  जीवन  चाहिए” तो “नफरत  का  भाव  त्याग  दो  फौरन” ,
“तुम असफल हो तो समझो” “तुमने दिल से सफलता का प्रयास नहीं किया” ,
” किसी  की  राह  का  रोड़ा  मत  बनो” , “खुद  अपनी  मंजिल  तलाश  करो” | |

[2]

” दर्पण  की  तरह  स्पष्ट  मन  लेकर  उठो “,” हंसमुख  उठो ” ,
“मित्र  हो या  शत्रु”,”सबसे  बेतकुलल्फी  व  प्रेम  से  मिलो” ,
“ऐसा ना ही रात भर में”-“मित्र दुश्मन व दुश्मन मित्र बन जाए” ,
“उन्मुक्त रहोगे तो” ” इस उठक-पठक को प्रेम से झेल जाओगे” |

[3]

“जो झुक कर चलना सीख गया जमाने में “,”मुकद्दर  की  सिकन्दर  बनते  देखा  है” ,
“खुदा कसम ” ” ये हुनर बड़े काम का है” “चौसर बिछाने वालों को हारते भी देखा है “|

[4]

“जलने  वाले  जला  करें “,” बस  हमें  तो  मुस्कराने  दो  यारों” ,
“हमें मुस्कराता देख शायद”, “तुम  भी  मुस्कराना  सीख  लो ” |

[5]

“अपना  हर  काम  ईमानदारी  से  करना ” “, इंसानियत  है “,
“प्रत्येक कार्य में आनंद तलासना “,” सबसे बड़ी इबादत  है ‘|

[6]

‘ मंजिल अगर दूर है घबरा मत “,” डगमगाया तो समझो गया “,
“अपनी उम्मीद का दीपक जलाए रख “,” प्रयास से पीछे न हट ” |

[7]

“चाहे किसी का बन,चाहे किसी को अपना बना”,” दोनों बराबर हैं” ,
“जिंदगी में नाइत्तिफ़ाकी नागवार गुजरती है “,” पछताते हैं सभी ” |

[8]

“उलझनें आती जरूर हैं” ” परंतु कुछ नुकसान नहीं करती कभी” ,
“भीतर छिपे पौरष को हवा देती है”,” हमारा सामार्थ  बढ़ाती  हैं “|

[9]

‘अपनापन तभी लगता है” ,”अलगाव की हल्की हवा कंपा डालती हो “,
“पंछी डाल से क्या उड़ा ‘,’ वह  टहनी देर  तक क्यों  काँपती  है , बता ” ?

[10]

‘ज़िंदा इंसान  को ‘ सहारा  देने  में  ‘ ‘ जान  निकलती  है’ ,
‘ मरे ‘ को ‘ कंधे   का  सहारा  देना ‘, ‘ पुण्य  समझते  हो  ‘ ,
‘ अजीब फितरत  है  इंसान  की’,’पुण्य को पाप समझते हैं’ ,
‘शमशानी प्यार’ दिखा कर”औरंगजेब समझता है खुद को’ |

 

 

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In Friendship Quotes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…