Home ज़रा सोचो ” कुछ मेरे’ विचार ‘ जो शायद आपके काम आ जाएँ ” | जरा सोचें |

” कुछ मेरे’ विचार ‘ जो शायद आपके काम आ जाएँ ” | जरा सोचें |

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[1]

‘कामयाबी’  से  मुलाकात  नहीं  हुई  है,
‘अभी  काम  अधूरा  है,
‘जब तक ‘जीत  का  सेहरा’  नहीं  सजता,
‘आराम  नहीं  आता’ ।

[2]

‘प्रणाम’ करना  सीखिए, ‘प्रणाम’- परिणाम  बदल  देते  हैं,
‘दुर्व्यवहारी  को  सुव्यवहारी  बनते ,’ बहुत  बार  देखा  है’ ।

[3]

‘मेरे  पास  कुछ  नहीं’  या  ‘मेरे  पास  सब  कुछ’  है ,
‘कमजोर  सोच  है,
‘मेरे  पास  कुछ  तो  है  बाकी  कमा  लूंगा”,
‘परिपक्व  सोच  है’।

[4]

‘ रावण ‘  को  उसकी  ‘ मैं ‘  ने  मारा  था ,’ राम  ने  नहीं,
‘उसका ‘अहम’ उसे  ले  डूबा, ‘विद्वत्ता’ धरी  की  धरी  रह  गई   थी  ।

[5]

‘उम्मीद  करना  भयंकर  भूल  है  हमारी,
‘इन्हें  पालेंगे  तो  परेशानियां  उपस्थित  होती  जाएंगी,
‘उन्मुक्त  होकर  जीने  की  कला  भी  सीख  लेनी  चाहिए,
‘ बड़े  काम  की  चीज  है’ ।

[6]

‘किसी  सदगुरु  की  शरण  में  जाओगे  तो,
‘भटकना  भूल  जाओगे,
‘जिस  सुई  में  धागा  लटका  होता  है,
‘खोने  का  अवसर  नहीं  होता’ ।

[7]

‘मुसीबत’  देखते  ही  आंखे  फेर  लेने  से,
‘समस्या’  हल  नहीं  होगी,
‘हिम्मत’  से  सामना  किया  तो,
‘हर ‘छल  बल  का  हल’  मिलना  सुनिश्चित  है’ ।

[8]

‘मन  बड़ा  ‘निर्दयी’  है, उलझा  कर  रखता  है, दुखी  करता  है  और  करता  रहेगा,
‘झटके  से  इस  ‘दुखद  क्रम’ को  तोड़  डालो, ‘सुदृढ़’ होने  का  प्रयास  जारी  रखो, 
‘मन की ‘कलाबाजियों  और उल्टे तर्कों’ के आगे  झुकना,समझदारी  का  सबूत  नहीं,
‘साहस , श्रद्धा , दृढ़  निश्चय  आपको,  मन  की  पिपासा  से  बचा  कर  रखेगा  सदा ।
[9]
 ‘सदा  ऐसे  कर्म  करते  रहो  जिससे  ‘ दुआएं ‘ तो  मिलने  ळगें ,
‘भगवान  के  दर्शन  हो  या  ना  हो, ‘कल्याण  का  मार्ग  तो  खुल  जाएगा’ ।
 

 

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