Home ज़रा सोचो ‘ कुछ तुम सुधरो कुछ हम , दोनों मिलकर जीवन सुंदर बनाएँगे ” |

‘ कुछ तुम सुधरो कुछ हम , दोनों मिलकर जीवन सुंदर बनाएँगे ” |

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[1]

‘शांत  रहकर  निमटते  से  रहना, ‘इश्क’  की  पहचान  है,
‘कौन  कहता  है  इश्क  में, ‘भयंकर  तूफान’  नहीं  आते !

[2]

‘पानी’  कितना  नरम  है, ‘बहाव  में ‘चट्टानों  को  चकनाचूर’  कर  देता  है,
किसी  को  सामान्य  समझ  ‘तिरस्कारना’, ‘अविवेकपूर्ण  कदम ‘  ही  है !

[3]

‘हमें ‘ गुमान ‘  न  हो  पाए, ‘अभिमान ‘ में  अपनी   हर  बात  प्यारी  लगती  है,
‘इसीलिए शरीर की तुलना ‘मिट्टी  के पुतले’ और ‘लकड़ी  के खिलौने’ से  करते  हैं’ !

[4]

‘हमें  सामने  वाला  ‘दागनुमा’  दिखता  है  तब,’थोथी  और  कटु’ बात  उभरती  है,
‘भाषा ‘  जिससे  ‘सम्मान’  उपजे , ‘प्रेममय’  हो, ‘ लचीली’  हो, ‘ उपयोग  करो ‘ !

[5]

‘ना  हम  पराए  हैं, ना  अजनबी, ‘आपके  साए  में  पलते  हैं,
‘ नजर  मत  चुरा  लेना  ‘प्रभु ‘, ‘ बिसार  मत  देना  कभी’ !

[6]

‘न शर्त रखो, ना  कोई  वादा  करो, ‘स्नेह  की ज्योति’ को जलने  दो,
‘एक दूसरे  को समझते  रहो, ‘रिश्तो’ को  समर्पण भाव  से  जिओ’ !

[7]

‘अगर  ‘  भीड़ ‘  गलत  दिशा  में  बढे , ‘ तो  उसका  हिस्सा  मत  बनो,
‘सूरज’ सही  दिशा  में  चलता  है, ‘दुनिया  को ‘रोशन’ किए  रखता  है’ !

[8]

‘जब  से  तुम  मेरी  जिंदगी  में  पधारे  हो,
‘जन्नत  का  मज़ा’ महसूस  होता  है,
‘खुशबूऔं  के  गुब्बारे’ मेरी  झोली  में  गिरते  हैं,
‘चहकने  लगी  हूं  मैं’ !

[9]

‘दूसरों  की  गलती’ निकाल  कर, ‘सुधारने  के  तरीके’ सुझाए  जाते  हो,
‘खुद’  कितने  बेढंगे  हो ,’दूसरों  की  निगाह’ परख  लेते  तो  अच्छा  था’ !

[10]

‘मंजिलें’ हासिल  न  कर  पाना, ‘ कमजोर  प्रयास ‘  का  परिणाम  है,
‘पुनः प्रयास’ होते रहने चाहिए, ‘घबराते’ रहे  तो कुछ  भी नहीं  होगा’ !

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