Home कविताएं “कुछ जानों , समझो तो जानें ” ! “कुछ छंद ” !

“कुछ जानों , समझो तो जानें ” ! “कुछ छंद ” !

6 second read
0
0
1,044

[1]

भक्त ने पूछा ;-
प्रभु -“तुम सर्वत्र हो फिर भी हमारी सभी इच्छाओं को पूरा नहीं करते” ?
प्रभु ने कहा :-
“एक बार दिल में   विश्वास  की  ज्योति  तो  जला  ,  फिर नज़ारा देख  ” |

[2]

” लोग लोगों का इस्तेमाल तो करते है विश्वास नहीं “,
“गोया हम किसी डिटर्जेंट पाउडर जैसे भी नहीं लगते ” |

[3]

दोस्ती ;-
“माँ-बाप , भाई , “बहन  या  पत्नी”,’ अब  सभी  रिस्ते  बिकाऊ  हैं ” ,
” प्रेम ‘ ,’  विश्वास ‘ ,’ भाई – चारा’,’ सब  कुछ  धराशायी  हैं  अब” ,
“एक  दोस्ती  का  रिस्ता  ऐसा  है” ,” जिस  पर  दाग  नहीं  देखा “,
“जिस दिन ये बिक जाएगा”,”उस दिन संसार उजड़ गया समझो” |

[4]

“दर्द  छिपा  कर  मुस्कराना  हंसी  खेल  नहीं  होता ” , 
“अपने गुस्से  के पीछे  प्यार की  ताबीर को  समझ ” ,
“खामोश रहने की वजह से भी ताल्लुक बनाए रख” ,
“मुस्कराने  की  कला  का  पारखी  बन  कर  उभर” |

[5]

“खुद की गल्ती स्वीकार करके” ” मन का मैल साफ करना सीख लो “,
“अजीब तो है पर चमचमाता दिल” , “सबके लिए प्यार की सौगात है ” |

[6]

‘तनाव’ ‘केवल  रोग  नहीं’ , ‘अनेकों  रोगों  का  कारण  भी   है ‘,
‘मनुष्य  अब  जीवन की  सारी  मिठास’ ‘ प्रायः  भूल  चुका  है’ ,
‘यदि तुम खुश नहीं रहते’ तो ‘दूसरों को कैसे खुश कर पाओगे’ ,
‘ आशावादी द्रष्टिकोण ‘ हर ‘तनाव’ से ‘राहत  दिला  देगा  तुझे ‘|

[7]

” भगवान  के  अहसास  कि  कड़ी  ही  प्रभु  से  जुड़ना  कहाती  है ” ,
” अहसास  खोते  ही  इंसान  का ” ” प्रभु  से  नाता  टूट  जाता  है” ,
“इसीलिए संतजन सारी उम्र” ” निरंकार  से  नाता जोड़े रखते  हैं” ,
“जागरूक रहते हैं कहीं बहक न जाएँ”,”सुमरण कभी नहीं भूलते” |

[8]

“जिसके पास कुछ भी नहीं होता- वही भीख मांगता है” ,” यही हकीकत है ” ,
“परंतु दौलत वाले उजले भिखारी हैं” ” जो मंदिर में जा कर भीख मांगते हैं “|

[9]

“मेरी सोच “;-
“जो कहता है” ‘समय नहीं ‘ “वह  व्यस्त  नहीं  अस्त-व्यस्त  है” ,
“उसे  ये  भी  नहीं  पता ” ” वो  मर  चुका  है  या अभी  ज़िंदा  है” |

[10]

“इंसान – दुनियादारी के नज़ारों में इतना खो जाता है” ,” परमात्मा को भूल जाता है “,
“सत्य का बोध कर” ,” प्रभु के  नूर का  दीदार कर “, ” सदभाव   की  कीमत  समझ ” |

 

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…