Home ज़रा सोचो “कुछ ऐसे भी विचारो- शायद कल्याण हो जाए ‘|

“कुछ ऐसे भी विचारो- शायद कल्याण हो जाए ‘|

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[1]

‘खुद  के  गिरेबान  में  झांको , ‘हकीकत  से  रूबरू  हो  जाओगे,
‘दूसरे  के  गिरेबान  में  झांकोगे  तो ,’दुनिया  के  झमेले  पाओगे’ !

[2]

‘खुशी’  देकर  बदले  में ‘उम्मीद’  करना  एक  ‘बीमारी’  है,
‘जो  देकर  ‘भूल’ जाता  है ,’उसका  नाम  ‘बांके  बिहारी’  है’

[3]

दुर्गा  मां ,भारत  मां, गंगा  मां, गऊ  मां, सब  को  प्रणाम  करता  है ,
‘ तेरी  जन्मदात्री  मां’ तुझे  देखने  को  तरसती  है, तू  नौटंकीबाज  है,
‘मां  के  साथ  खाना  खा  लेता, आशीष  ले  लेता, क्या  बिगड़  जाता,?
‘तू  आधुनिकता  की  बपौती  बन  गया , ‘शालीनता  से  दूर  मिलता  है ‘ !
[4]
‘स्पष्ट  विचार , शांत  शब्द  और  स्पष्ट  दृष्टिकोण,
‘सफलता के  सोपान  हैं,’ चाहे जब  आजमा  लेना’।
[5]
‘एकता  और  एकाग्रता’ जीवन  है, ‘अकेलापन’ मृत्यु  का  सोपान,
‘ एकता ‘- जागृति  का  ज्वलंत  स्वरूप  है, ‘बुराई  का  अंत  है’ !
[6]
‘स्वस्थ  मन’- ‘सुखी  दुनियां’ इजाद  करता  रहता  है,
‘कमजोर  सोच’  सुख  को  आगे  आने  ही  नहीं  देती’।
[7]
‘अगर  ‘दुआएं’  मिलती  रही , ‘मुसीबतें  टलती  जाएंगी ,
‘अगर हवाएं  माकूल  बही, ‘मौसम’ भी  रुख  बदल  लेगा’।
[8]
‘तमन्ना’ अगर  पूरी  हो  गई  तो, ‘उसे ‘तमन्ना  का  तमगा’ नहीं  मिलता,
‘ तमन्ना ‘  तभी  तक ‘ तमन्ना ‘ है ,’ जब  तक  वह  पूरी  नहीं  होती’ ।
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